बांसवाड़ा तिहरा हत्याकांड : पिता और पुत्रों की हत्या के बाद भागे आरोपी मंदिरों में घुमते रहे, पीछे लगी रही पुलिस

बांसवाड़ा तिहरा हत्याकांड : पिता और पुत्रों की हत्या के बाद भागे आरोपी मंदिरों में घुमते रहे, पीछे लगी रही पुलिस

Ashish vajpayee | Publish: Sep, 07 2018 11:24:08 AM (IST) Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने बाद आरोपियों ने अपना ज्यादातर समय धार्मिक स्थलों पर काटा। आरोपी ने सुबह करीब साढ़े दस बजे हत्याकांड को अंजाम दिया। इसके बाद बाइक एवं कार को लेकर घर पहुंचे। जहां कपड़े एवं अन्य जरूरी कार्य करने के बाद उदयपुर रोड स्थित गैरेज पर वारदात में प्रयुक्त कार को रखा। इसके बाद आरोपियों ने दूसरी कार ली और उसी में बैठकर फरार हुए।

कई जगह की तलाश
आरोपियों की पुलिस की अलग-अलग टीमों ने बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर, चित्तौडगढ़़, सिरोही, जैसलमेर एवं जोधपुर सहित अन्य कई जगहों पर तलाश की। मध्य प्रदेश के रतलाम, मंदसौर, नीमच के पुलिस अधिकारियों से भी आरोपियों के बारे में पूछताछ की गई।

इन पुलिसकर्मियों का रहा सहयोग
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आईजी विशाल बंसल के निर्देश पर पुलिस की दो टीमों का गठन किया गयाथा। इनमें एएसपी चंदनदान बारहठ, डिप्टी घनश्याम शर्मा, सीआई शैतान सिंह, देवीलाल, रविन्द्र सिंह, दिलीपदान, तुलसीराम सहित साईबर सैल के प्रवीण सिंह एवं प्रवीण कुमार सहित अन्य शामिल थे। एटीएस उदयपुर के श्याम रत्नू का भी सहयोग लिया।

पांच दिनों में आरोपियों ने यह किया
पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत ने बताया कि एक सितंबर को वारदात करने के बाद आरोपी पाली जिले के नाड़ोल पहुंचे जहां राम रसोड़ा में ही उन्होंने खाना खाया।
2 सितंबर को आरोपी पाली से जोधपुर पहुंचे और वहां रामदेवरा से करीब 40 किलोमीटर पहले खाना खाया और वहीं कहीं रुके। दर्शन के लिए चार घंटे लाइन में खड़े रहे
3 सितंबर को आरोपी रामदेवरा पहुंचे और वहां करीब तीन-चार घंटे लाइन में लगे और दर्शन किए।
4 सितंबर की रात को वहां से निकलकर वापस नाड़ोल पहुंचे। जहां फिर आशापुरा माता के दर्शन किए और खाना खाया और रात बिताई।

5 सितंबर की सुबह आरोपी उदयपुर के सेक्टर ग्यारह में पहुंचे, जहां पुलिस को भनक लगी तो आरोपी घिरते चले गए। रावत ने बताया कि आरोपी अहमदबाद जाने वाले थे, लेकिन किन्हीं कारणों से चित्तौडगढ़़ की तरफ चले गए और यहीं से पुलिस का ऑपरेशन शुरू हो गया था।एसपी ने खुद सभी टोल नाकों पर करवाई निगरानीआरोपी उदयपुर के सैक्टर ग्यारह से जैसे ही कार नंबर 1881 से निकले तो पुलिस को इसकी भनक लग गई। इसकी सूचना पर एसपी ने उदयपुर से निकलने वाले सभी टोल नाको से लेकर अन्य थानों पर सूचना करवाई।

साथ ही सभी को यह संदेश दिया गया कि टोल नाकों पर निगरानी रखने के साथ अपने इलाकों में इस गाड़ी की छानबीन करें। इसमें आतंकवादी निरोधक दस्ते को भी शामिल किया गया। एसपी ने बताया कि आरोपी फतेहपुरा की तरफ मुड़े तो पुलिस को इसकी सूचना तत्काल पहुंच गई। इसके बाद आरोपियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पकड़ लिया और वहां से सीधे जाने लगे। आरोपियों ने जैसे ही मंगलवाड़ हाइवे का टोल नाका पार किया तो पुलिस को इसकी भनक लग गई। इस पर पहले से अलग-अलग स्थानों पर घूम रही पुलिस की टीमों को एसपी ने आगाह कर दिया। साथ ही चित्तौडगढ़़ एवं इसके आस-पास रहने के संकेत दिए। साथ ही कहा गया कि सभी अलग-अलग निर्धारित स्थान खड़े रहने के साथ केवल निगरानी रखे।

इससे पूर्व एसपी सभी टोल नाकों से जहां से बांसवाड़ा पासिंग 1881 नंबर कार निकली उसके फुटेज निकलवाने शुरू कर दिए। इसके बाद आरोपी गंगरार तक पहुंचे। एसपी ने बताया कि आरोपी जैसे ही मंगलवाड़ से निकले तो उनकी हल्की भनक लग गई थी। इससे आरोपी बीच रास्ते में चित्तौडगढ़़ की तरफ मुड़ गए। इसी दरम्यान एसपी को एक एसएचओ ने 1881 नंबर की कार देखने की जानकारी दी। इस पर एसपी ने पुलिस टीमों को मण्डफिया की तरफ भेजा और सभी रास्तों को ब्लॉक करवाया। आरोपी जब मण्डफिया से रवाना होने वाले थे तभी पुलिस ने सभी को वहां दबोच लिया। आरोपियों की भागने की योजना थी लेकिन पुलिस के घेरे में फंसने के बाद उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पाए।

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