Video : राजस्थान में यहां बच्चों के पोषाहार में जादूई दाल ने छोड़ा ऐसा काला रंग, वीडियो देखते ही आप भी रह जाएंगे दंग...

By: milan Kumar sharma

Published: 19 Jan 2019, 01:00 PM IST

Banswara, Banswara, Rajasthan, India

मिलन शर्मा. डूंगरपुर. सरकारी स्कूलों के बच्चों को हष्ट- पुष्ट बनाने और उन्हें कुपोषण के दंश से दूर रखने के लिए चल रही मिड डे मील योजना के तहत आपूर्ति की गई दाल की गुणवत्ता में गड़बड़झाला पकड़ में आया है। दाल को पानी में भिगोते ही काला रंग छूट गया। राज्य केन्द्रीय जन जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला से जांच में इस दाल को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित और अनफिट करार दिया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर डूंगरपुर जिले ने आपूर्ति की गई 21 टन दाल लौटा दी। बच्चों के सम्पूर्ण पोषण के लिए पिछली सरकार ने नवाचार करते हुए पहली बार पोषाहार में उड़द दाल छिलका को शामिल किया था। दाल आपूर्ति का जिम्मा भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ को सौंपा था।

जांच में पाया- दाल पर कलर कोटिंग की गई
राज्य केंद्रीय जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला जयपुर में इन नमूनों की जांच के बाद मुख्य खाद्य विश्लेषक पंकज कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि दालों के दोनों नमूने कलर कोटेड हैं जिनकी खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 के निर्धारित प्रावधानों के तहत अनुमति नहीं है और इसीलिए ये मानव उपभोग के लिए असुरक्षित और अनफिट हैं।

डीईओ की पारखी नजर आई काम
आपूर्ति की गई दाल देखने में बिल्कुल साफ थी। देखकर कोई भी इसे अस्वीकार नहीं करे। गृहिणी की पारखी नजर से ये बच नहीं पाई। महिला जिला शिक्षा अधिकारी को दाल को हाथ लगाते ही आशंका हो गई, क्योकि किसी भी दाल का प्राकृतिक रंग नहीं छूटता। दाल को पानी में भिगोया तो रंग छूट गया।

यूं पकड़ में आई गड़बड़ी
डूंगरपुर सहित पूरे प्रदेश में नवम्बर 2018 में पहली बार स्कूलों के लिए छिलका युक्त उड़द की दाल के ट्रक पहुंचे। डूंगरपुर की जिला शिक्षा अधिकारी गिरिजा वैष्णव ने जिज्ञासावश ट्रक में से कुछ दालों के कट्टे उतरवा कर दाल की जांच की। अलग-अलग कट्टों में हाथ डालने पर हाथ काले हो गए तो उन्हें गुणवत्ता को लेकर शंका हुई। उन्होंने तत्कालीन जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट को सूचना दी। भट्ट ने रसद विभाग, तहसीलदार, खाद्य निरीक्षक एवं डीईओ की टीम गठित कर दाल की जांच करवाई। इससे सभी ने पाया कि दाल काला रंग छोड़ रही है। इस पर दाल के दो नमूने सील चस्पा कर गुणवत्ता जांच के लिए खाद्य विश्लेषक सीएमएचओ कार्यालय जयपुर को भेजे।

डीईओ ने कहा
जांच रिपोर्ट के आधार पर दाल वापस भेजकर नई मंगवाई। वह दाल खाने योग्य नहीं थी।
- गिरिजा वैष्णव, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक

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