बांसवाड़ा : 4जी के जमाने में ‘लैंडलाइन’ को बचाने की जद्दोजहद में जुटे बुजुर्ग

Ashish vajpayee

Publish: Oct, 13 2017 08:28:08 PM (IST)

Banswara, Rajasthan, India
बांसवाड़ा : 4जी के जमाने में ‘लैंडलाइन’ को बचाने की जद्दोजहद में जुटे बुजुर्ग

6 माह से वृद्धजन लगा रहे बीएसएनएल दफ्तरों के चक्कर, मिलती है कनेक्शन कटवाने की नसीहत, लेकिन लाइन न कटवाने पर अड़े वृद्ध, बोले-सही करवाकर ही लेंगे दम

बांसवाड़ा. चाहे हजारों चक्कर लगाने पड़े, इल्तजा करनी पड़े। शिकायतें देनी पड़े या धरने पर बैठना पड़े, लेकिन बीएसएनएल के लैंडलाइन कनेक्शन नहीं कटवाएंगे। ६ माह से बंद पड़े टेलीफोन की घंटी सुनकर ही दम लेंगे। यह कहना है बांसवाड़ा जिला मुख्यालय से ५० किमी दूर स्थित डडूका गांव के कुछ लोगों का। दरअसल, गांव के कुछ बुजुर्ग अपने घरों में लगे बीएसएनएल के बेसिक फोन शुरू कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

एक ओर जहां जमाना 4जी संग दौड़ रहा है, 5जी को लाने के सपने संजोए जा रहे हैं। वहीं, दमतोड़ रहे बेसिक फोन को बचाने के लिए यह जज्बा गौर करने लायक है। एक ओर जहां निजी टेलीकॉम कम्पनियां घर-घर, चौराहे-चौराहे लोगों को कनेक्शन बांट रही है, इतनी कठिन प्रतिस्पर्धा के दौर में दमतोड़ रहे बीएसएनएल को अपने कनेक्शन को बचाने की नहीं पड़ी। सिर्फ अधिकारियों की लापरवाही के चलते विभाग की आय पर तो फर्क पड़ ही रहा है, साख गिर रही सो अलग।

प्रधानमंत्री को भी लिखा पत्र

6 माह से समस्या का समाधान न होने पर गांव के इन बुजुर्गों ने समाधान के लिए प्रधानमंत्री को भी पत्र लिख पीड़ा सुनाई। लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय से कोई जवाब नहीं आया है। पत्र में बुजुर्गों के द्वारा विभागीय अफसरों की कार्यशैली का भी स्पष्ट वर्णन किया गया है।

65 नए कनेक्शन की चाहत

इस गांव के 65 अन्य लोग नए बेसिक कनेक्शन लेने के लिए फॉर्म भी तैयार कर रहे हैं, लेकिन बीएसएनएल अधिकारियों की कार्यशैली को देखते हुए वे सभी कनेक्शन लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इतना ही नहीं एक जमाने में इस गांव में तकरबीन बीएसएनएल के 110 बेसिक कनेक्शन हुआ करते थे। लेकिन अधिकारियों के शिथिलता के कारण गांव में अब महज 7 कनेक्शन ही बचे हैं। इन सात कनेक्शनों को पुन: शुरू कराने के लिए ही गांव के बादामी लाल कोठिया, चंद्रपाल शाह सहित अन्य बुजुर्गों ने बीएसएनएल दफ्तर पहुंच प्रबंधक को पीड़ा सुनाई।

नहीं कर पाते बच्चों से बात

गांव के ही बुजुर्ग जयंतीलाल ने बताया कि उनके बच्चे नौकरी के लिए बाहर रहते हैं, गांव में सिर्फ वे और उनकी पत्नी रहती हैं। उम्र हो जाने के कारण चलना फिरना भी दुश्वार है। घरों में मोबाइल का नेटवर्क भी नहीं आता। लैंडलाइन फोन भी कटा है। बच्चों से बात तक नहीं हो पाती है। रात में आठ बजे के बाद हम मियां-बीबी घर की छत पर जाएं या घर के बाहर चौराहे पर जाकर बात करें। इतनी समस्या हो गई, लेकिन विभाग के अफसर सिर्फ आश्वासन देकर टरका देते हैं।

बोले कटवा दो कनेक्शन

गांव के बुजुर्ग वासुदेव मेहता ने बताया ६ माह से वे कभी परतापुर तो कभी बांसवाड़ा कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, टोल फ्री नंबर पर शिकायतें की, वहां से भी समस्या के समाधान के मैसेज आ जाते हैं। जबकि एक बार भी कनेक्शन सुधारे नहीं गए। इतना ही नहीं सैकड़ों बार अधिकारियों को फोन किए हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। परतापुर कार्यालय में कार्यरत अधिकारी ने यहां तक कह दिया कि कनेक्शन कटवा दो। तब हम सभी ने भी जिद ठान ली की ठीक करवाकर ही दम लेंगे।

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