भंडार में रखे 500 क्विंटल गेहूं खराब होने पर राशन के नए गेहूं से कर रहे अदला-बदली, मनमाने तरीके से चल रहा खेल

- राजस संघ का ये कै सा खेल, राशन के नए गेहूं में सड़े-गले का घालमेल
- खाद्य सुरक्षा के तहत बंट रहे गेहूं से कर रहे अदला-बदली
- गेहूं खराब होने व सडऩे लगा तो निकाला तोड़
- अफसरों की अनुमति के बिना मनमाने तरीके से चलाया जा रहा खेल

By: Varun Bhatt

Updated: 05 Sep 2019, 12:38 PM IST

Banswara, Banswara, Rajasthan, India

रामकरण कटारिया/बांसवाड़ा. काम के बदले अनाज योजना का करीब पांच सौ क्विंटल गेहूं पिछले करीब छह साल से गोदाम में पड़े पड़े पाउडर होने और सडऩे की नौबत तक पहुंच गया है और अब अपनी बला टालने के लिए राजस संघ ने ऐसा तोड़ निकाला है जो सवालों के घेरे में आ गया है। राजस संघ ने खाद्य सुरक्षा योजना के तहत आ रहे नए गेहूं के कुछ कट्टे ट्रक से उतरवा कर उनकी जगह इस पुराने गेहूं के कट्टे भरने का खेल चला रखा है। दिलचस्प यह भी है कि उसे ऐसा करने का कोई आदेश भी नहीं मिला है और अपने स्तर पर ही उसने ये कृत्य कर डाला। गौरतलब है कि अकाल राहत कार्यों के दौरान लोगों को मजदूरी राशि का नकद भुगतान न कर काम के बादले अनाज योजना शुरू गई की थी, जिसका बड़ी मात्रा में गेहूं राजस संघ के गोदाम में पड़ा रह गया। योजना बंद होने पर इसे कहीं खपाया नहीं गया। खाद्य सुरक्षा के तहत सितंबर 2018 से वितरण व्यवस्था ऑनलाइन होने से एफसीआई से प्राप्त माल मात्रा अनुसार ही डीलरों को भिजवाया जाने लगा। ऐसे में काम के बदले अनाज योजना का गेहूं छह साल तक पड़ा-पड़ा पाउडर होने लग गया। इल्लियां पडऩे से गेहूं के दाने खोखले हो गए। कट्टे भी गल गए।

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ऊपर से सुनवाई नहीं तो निकाला तोड़
भण्डारित गेहूं को खराब होने से बचाने के साथ बंटवाने को लेकर स्थानीय क्षेत्रीय प्रबंधक ने जिला रसद अधिकारी से लेकर संबंधित आला अधिकारियों को कई पत्र लिखे गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई तो स्थानीय स्तर पर तोड़ निकाला गया। जिसके तहत भण्डार में ऑनलाइन व्यवस्था के तहत गेहूं लदे ट्रक चालान पर्ची सत्यापित कराने आने पर उनमें भरे राशन के गेहूं से नया माल उतारकर एवज में उतना ही पुराना गेहूं उनमें लादा जा रहा है। इस तरह रोजाना दस कट्टे खपाए जा रहे हैं।

अधिक समय नहीं रह सकते सुरक्षित
गोदाम के कार्मिकों के अनुसार सामान्य रूप से अनाज छह माह तक तथा देशी उपाय राख व नीम की पत्तियां या दवा डालकर भी अधिकतम ढाई से तीन साल तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद इनमें इल्लियां आदि पडऩा शुरू होने से चून बनने लग जाता है।

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लिख चुके कई पत्र
एनएफडब्ल्यू एवं अन्नपूर्णा योजना को खाद्य सुरक्षा में परिवर्तित कर अंतर राशि जमा करने एवं वितरण की कार्रवाई के लिए आला अधिकारियों को कई पत्र लिखे जा चुके हैं। जिला रसद अधिकारी की ओर से भी खाद्य विभाग को पत्र लिखे गए, लेकिन खाद्य विभाग जयपुर से ही गेहूं वितरण के निर्देश नहीं मिल रहे हैं। भण्डारित गेहूं के सदुपयोग के लिए नए गेहूं से कुछ मात्रा में प्रतिदिन अदला-बदली की जा रही है।
जितेन्द्र सिंह राठौड़ क्षेत्रीय प्रबंधक, राजससंघ लि. बांसवाड़ा

इनका कहना है
गोदाम में काम के बदले अनाज योजना के भण्डारित गेहूं के सदुपयोग के लिए कुछ कट्टे रोजाना नए उतार कर उतने ही पुराने ट्रकों में लादे जा रहे हैं।
विजय यादव स्टॉक प्रभारी, राजससंघ लि. बांसवाड़ा।

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