बांसवाड़ा : दूसरों के लिए जीने वाला ही 'महावीर'

कुशलबाग में ज्ञान गंगा महोत्सव में आचार्य के प्रवचन

By: Ashish vajpayee

Updated: 07 Mar 2020, 12:20 AM IST

बांसवाड़ा. जैनाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा है कि स्वांत सुखाय की जगह हमें परजन हिताय की भावना रखनी चाहिए। इंसान ही इंसान के काम आए, ईश्वर की इससे बड़ी पूजा नहीं हो सकती है। दूसरों के लिए जीने वाला ही महावीर है।
कुशलबाग मैदान में ज्ञान गंगा महोत्सव में प्रवचन देते हुए आचार्य ने कहा कि एक पत्थर और गोली का सफर 50 फीट तक होता है, लेकिन गरीब की थाली में रोटी रखने वाले का सफर भगवान तक होता है। रोटी से बड़ा कोई ईश्वर नहीं है। हमेशा गरीब की सहायता के लिए तत्पर रहने और सद्कर्मों की सीख देते हुए उन्होंने कहा कि किसी के दिल में रहो या किसी की दुआ में रहो, तभी जीवन जीना सार्थक है। रोटी के लिए अपनों को छोडऩे वाले नहीं, अपनी रोटी को छोडऩे वाले ही भगवान के प्रिय होते हैं। उन्होंने कहा कि धनपति के लिए धन, जौहरी के लिए हीरे-मोती, वैराग्य के लिए त्याग और गरीब के लिए रोटी ही भगवान है।
हौंसला सबसे बड़ा साथी
आचार्य ने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा साथी हौंसला, हिम्मत, साहस है। बुरे समय में कोई साथ नहीं देता है, तब साहस ही विकट परिस्थितियों से लडऩे, उबरने और आगे बढऩे का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि जहां अहंकार होता है, वहां नमोकार नहीं होता। जहां नमोकार होता है, वहां अहंकार का कोई स्थान नहीं है। प्रवचन श्रवण करने अनन्य भक्त शोभा धारीवाल भी पहुंची। संत सान्निध्य में उन्होंने प्रतिभाओं को सम्मानित किया। इससे पहले आचार्य के पाण्डाल में पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवृष्टि कर उनकी अगवानी और पाद प्रक्षालन किए। इस अवसर पर बांसवाड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

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