बांसवाड़ा : पहले महिला को उदयपुर ले गए, फिर लौटे और गला घोंटकर हत्या के बाद जला दिया

बांसवाड़ा : पहले महिला को उदयपुर ले गए, फिर लौटे और गला घोंटकर हत्या के बाद जला दिया

Ashish vajpayee | Publish: Feb, 15 2018 12:02:34 PM (IST) Banswara, Rajasthan, India

समाईमाता के पास झाडिय़ों में अधजला व सड़ा-गला शव मिलने का मामला

बांसवाड़ा. शहर के समाईमाता क्षेत्र में तीन माह पूर्व झाडिय़ों में मिले महिला के अधजले शव के मामले में पुलिस पड़ताल में नए तथ्य सामने आए हैं। महिला की गला घोंटकर हत्या करने व डीजल उड़ेलकर जला देने से पूर्व आरोपित संतोष उर्फ अनीता को विश्वास में लेकर उदयपुर ले गए थे। साथ ही आरोपित परवेज एवं उसके साथी साबिर ने यह भी कहा था कि अब वे उदयपुर में ही रहेंगे।

इसके बाद जब वे उदयपुर पहुंचे तो वहां आरोपितों ने बहाना बनाया कि वे जहां वे रहने वाले थे वहां पर अभी दोस्त नहीं है। इसलिए दोबारा उदयपुर आना पड़ेगा। ऐसा कहते हुए आरोपित गोगुंदा से वापस लौट आए। साथ ही रास्ते से डीजल की एक केन भी वाहन भी रख ली। इसके बाद यहां समाईमाता पहुंचे और भण्डारिया हनुमान मंदिर के पास ही आरोपितों ने महिला का गला घोंटा और फिर नीचे पटकने के बाद उस पर डीजल उड़ेलकर आग लगा दी। डिप्टी वीराराम ने बताया कि किसी को शक नहीं हो इसके लिए आरोपितों उदयपुर के रास्ते में ही फोन भी बंद कर लिए। इसके बाद पूरी वारदात को अंजाम दिया।

कई बच्चें हैं महिला के
पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत ने बताया कि महिला की दो शादी गुजरात एवं सलूंबर में होने के साथ यह तीसरी शादी बांसवाड़ा हुई थी। इसके अलावा सभी से एक से दो बच्चे भी हैं।

यह था मामला
समाईमाता में सडक़ किनारे झाडिय़ों के पास चार नवंबर, 2017 को एक अज्ञात महिला का अधजला एवं सड़ा-गला शव मिला, जिसमें कीड़े पड़ चुके थे। इसमें पुलिस ने डीएनए जांच कर महिला की शिनाख्त त्रिपुरा कॉलोनी निवासी संतोष उर्फ आयशा उर्फ अनीता (30) पुत्री जगदीश सिकलीगर के रूप में की। साथ ही हत्या के आरोप में पुलिस ने 13 फरवरी को राजतालाब निवासी परवेज (26) पुत्र शरीफ खां तथा अंबावाड़ी निवासी साबिर उर्फ नाया (23) पुत्र अनवर खां को गिरफ्तार किया है।

पुलिस को शुरू से ही शक हो गया
डिप्टी ने वीराराम ने बताया कि महिला ने जब परिवाद दिया और वह गायब हुई। इसके ठीक बाद समाईमाता के पास अधजली लाश मिली। इससे पुलिस को शक हो गया था, लेकिन पुलिस के पास पुख्ता प्रमाण नहीं थे। इसके चलते पुलिस आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सबूत ढूंढने में लगी रही। तब तक आरोपित बेखौफ होकर घूमते रहे। पुलिस के हाथ जैसे ही डीएनए रिपोर्ट लगी। ठीक उसी समय पुलिस ने दोनों आरोपितों को दबोच लिया।

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