Malnutrition : मां की गुटखा-तम्बाकू खाने की लत से बच्चे रह जाते है कुपोषित, जन्म से ही नहीं हो पाता मासूमों का विकास

Malnutrition : मां की गुटखा-तम्बाकू खाने की लत से बच्चे रह जाते है कुपोषित, जन्म से ही नहीं हो पाता मासूमों का विकास
Malnutrition : मां की गुटखा-तम्बाकू खाने की लत से बच्चे रह जाते है कुपोषित, जन्म से ही नहीं हो पाता मासूमों का विकास

Varun Kumar Bhatt | Updated: 11 Oct 2019, 11:55:34 AM (IST) Banswara, Banswara, Rajasthan, India

malnutrition in banswara, malnourishment in rajasthan : चिकित्सकों का दावा - निकोटीन और केमिकल की वजह से नहीं हो पाती गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ

बांसवाड़ा. यों तो गुटखा और तम्बाकू का सेवन सभी के लिए हानिकारक है और कैंसर का कारण बनता है, लेकिन गर्भवती या धात्रि के द्वारा सेवन करने पर इसके दुष्परिणाम गर्भ में पल रहे बच्चे को भुगतने पड़ते हैं। बच्चे जन्म से ही कुपोषित और कमजोर होते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक बांसवाड़ा में जन्म लेने वाले बच्चों की कम वजन और ग्रोथ कम होने की समस्या की एक वहज यह भी है। ग्रामीण अंचल में महिलाएं गुटखा और तम्बाकू का सेवन नियमित और गर्भधारण के समय भी करती रहती है और इससे गर्भस्थ शिशु पर असर पड़ता है।

बांसवाड़ा के दुधमुंहे बच्चे अधिक कुपोषित : - महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों की मानें तो बांसवाड़ा में जन्मे और दुध मुंहे बच्चों में कुपोषण अधिक होता है। जिले में जन्म से तीन वर्ष तक उम्र के 7717 लडक़े और 7662 लडिकय़ां कुपोषित हैं। वहीं, इसी आयु वर्ग में 68 लडक़े और 100 लड़कियां अतिकुपोषित हैं। दूसरी ओर 3 से 5 वर्ष आयुवर्ग में 3400 लडक़े और 3511 लड़कियां कुपोषित हैं जबकि 3 लडक़े और एक लडक़ी अतिकुपोषित हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है जन्म के समय और मां का स्तनपान करने की उम्र तक के बच्चे अधिक कुपोषित हैं। डिप्टी सीएमएचओ डॉ दीपक निनामा ने बताया कि महिलाओं के द्वारा तम्बाकू सेवन की लत ग्रामीण इलाकों में अधिक देखने को मिलती है। नशे के खिलाफ आमजन को जागरूक करने के लिए भारत सरकार की ओर से निरंतर कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत बांसवाड़ा में समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम होते हैं।

1. नहीं बढ़ पाता वजन : - स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ ओपी उपाध्याय के अनुसार महिलाओं के गुटखा और तम्बाकू का सेवन करने से उनकी सेहत पर विपरीत असर पड़ता है। उनकी भूख कम हो जाती है। इससे गर्भावस्था के दौरान वो ठीक से खाना नहीं खा पाती और पेट में पल रहे भ्रूण को भरपूर पोषण नहीं मिल पता और वो कमजोर हो जाता है। गर्भ के दौरान उनकी पेट की आंतें गुटखा और कम भोजन के चलते सिकुड़ जाती हैं। मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं। इन सभी वजहों से बच्चों का वजन नहीं बढ़ पाता है।

2. नहीं बनता मां का दूध : - शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रद्युमन शाह ने बताया कि गुटखा और तम्बाकू में मिले निकोटीन और केमिकल बहुत ही ज्यादा घातक होते हैं। इसके सेवन से मां का दूध ठीक से नहीं बनता है, इससे बच्चा कुपोषित रह जाता है। गर्भ के अंतिम माह में बच्चे का वजन 20 फीसदी तक बढ़ता है, लेकिन गुटखे के निकोटीन व केमिकल के कारण बच्चा यह ग्रोथ नहीं कर पाता है और उसक वजन कम रह जाता है। बच्चा पैदा होने के साथ ही कमजोर होता है और बाद में मां का दूध भी कम बनने के कारण बच्चे की ग्रोथ पर फर्क पड़ता है।

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