Video : बांसवाड़ा में कोरोना संदिग्धों की स्क्रीनिंग के इंतजाम नाकाफी, बिना किट जांच करने से डॉक्टरों ने किया इनकार

Corona Virus Effects, Corona Supects Screening : बिना किट संदिग्धों की स्क्रीनिंग से खौफ, घंटेभर बाद किट मुहैया कराने पर जुटे, स्टाफ में असंतोष बरकरार

बांसवाड़ा. जिला मुख्यालय के एमजी अस्पताल में देश-विदेश में कामकाज को लेकर प्रवासी वागड़वासियों की कोरोना के चलते वापसी पर स्क्रीनिंग को लेकर पूरे इंतजाम नहीं होने से चिकित्सकों-स्टाफ में खौफ है। मंगलवार सुबह संदिग्ध लाने पर यहां किट एवं संसाधन नहीं होने पर भय के मारे दो चिकित्सकों ने स्क्रीनिंग से इनकार कर दिया। करीब घंटाभर तक चली कशमकश के बाद किट का जुगाड़ किया गया, तब काम शुरू हुआ। इससे पहले यहां मुंबई से आए तीन, भीलवाड़ा से आए दो और गांधीनगर से आए एक जने सहित आठ लोगों को स्क्रीनिंग के लिए लाया गया था। इससे पहले रात में लाए गए चार जनों में से एक आइसोलेशन में भेजा जा चुका था। इसके बाद नए आए संदिग्धों की स्क्रीनिंग को लेकर चिकित्सकों के पीछे हटने पर उनके साथ जुटे नर्सिंगकर्मी और स्टाफ सदस्य भी सहम गए। नाम नहीं छापने की शर्त पर कार्मिकों ने बताया कि जब डॉक्टर ही खुद को सुरक्षित नहीं मानते, तो हम कैसे काम करें। संदिग्धों की स्क्रीनिंग में मदद के दौरान हमें कोई सहुलियत नहीं है। मेडिकेयर के क्वालिटी वाले पीपी किट की बात तो दूर, अस्पताल में हैंड सेनेटाइजर तक उपलब्ध नहीं है और स्प्रीट से काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा जिन्हें किट दिए जा रहे हैं, वे भी एचआईवी रोगियों और ओटी में इस्तेमाल होने वाले किट हैं। सबको ऐहतियात की नसीहत दे रहे हैं, लेकिन यहां हमारी खुद की हालत खराब है। वार्डों में भी हैंड सेनेटाइजर तक नहीं है। इस पर वार्ड प्रभारियों ने भी सेनेटाइजर और संसाधनों की मांग उठाई है।

स्क्रिीनिंग मशीन भी एकमात्र, जरूरत पर इंतजार : - यहां स्क्रीनिंग के लिए मशीन भी सुबह एक ही थी। ऐसे में 2-4 जगह जरूरत पर इंतज़ार के सिवा चारा नहीं दिखाा। संसाधनों के चक्कर मे सुबह एक घण्टे स्क्रीनिंग के लिए घबराए लोग बाहर डोलते रहे। हालांकि चर्चा पर रेपिड रेस्पोंस टीम के सदस्य चिकित्सकों ने कहा कि स्क्रीनिंग अलग जगह हो रही है, जहां किट की जरूरत नहीं है। संदिग्ध को आइसोलेशन में रखा जा रहा है, वहां भी पूरा ऐहतियात है। डोनिंग एरिया में किट पहनने, फिर जरूरत अनुसार संदिग्ध आइसोलेट से संपर्क के बाद डोफिंग एरिया में किट निकालने की व्यवस्था है। सेंपल लेने के लिए किट उपलब्ध हैं और यह काम चिकित्सक ही कर रहे हैं। उनकी अनुपस्थित पर ट्रेंड टेक्निशियन को यह जिम्मा सौंपा है। महात्मा गांधी अस्पताल के पीएमओ डॉ. नंदलाल चरपोटा का कहना है कि अस्पताल में संसाधनों की कमी पर इंदौर, अहमदाबाद से संपर्क कर इंतजाम कर रहे हैं। हैंड सेनिटाइजर नहीं है, तो स्प्रीट उसका विकल्प है। सुरक्षा में चूक नहीं रहेगी।

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deendayal sharma Desk
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