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यह डॉग स्कवॉड ना जाने कहा खो गया

Don't know where this dog squad got lost नरेन्द्र वर्मा । हस्की, होजी एवं क्लेरिशा, यह वह नाम है, जो कि बांसवाड़ा पुलिस महकमे में उपनिरीक्षक यानी थानेदार रहते हुए अपराधियों के नाकों चने चबा दिए। लेकिन इनकी मौत के बाद से जिले का डॉग स्कवॉड सूना है। इनके नहीं रहने से इनके आवास भी अब डीएसटी के खाते में चला गया है। इधर, पड़ोसी जिले डूंगरपुर, प्रतापगढ़ के साथ ही राजसमंद जिले में भी डॉग स्कवॉड नहीं होने से जिला पुलिस की मुसीबतें कहीं अधिक बढ़ गई है।

बांसवाड़ा

Published: September 12, 2022 12:37:18 pm

Don't know where this dog squad got lost नरेन्द्र वर्मा । हस्की, होजी एवं क्लेरिशा, यह वह नाम है, जो कि बांसवाड़ा पुलिस महकमे में उपनिरीक्षक यानी थानेदार रहते हुए अपराधियों के नाकों चने चबा दिए। यह दोनों आम इंसान नहीं वरन पुलिस डॉग स्कवॉड के खोजी श्वान थे। इन्होंने अपनी सुंघने की क्षमता के बूते एक दो नहीं वरन दर्जन से अधिक संगीन मामलों की परतें खोलते हुए अपराधियों को सलाखों के पीछे़ पहुंचाया। लेकिन इनकी मौत के बाद से जिले का डॉग स्कवॉड सूना है। इनके नहीं रहने से इनके आवास भी अब डीएसटी के खाते में चला गया है। इधर, पड़ोसी जिले डूंगरपुर, प्रतापगढ़ के साथ ही राजसमंद जिले में भी डॉग स्कवॉड नहीं होने से जिला पुलिस की मुसीबतें कहीं अधिक बढ़ गई है। Don't know why this dog squad is missing

यह डॉग स्कवॉड  ना जाने कहा खो गया
यह डॉग स्कवॉड ना जाने कहा खो गया
अपराधियों की गिरहेबान तक पहुंचने के लिए मोबाइल कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन एवं सीसी कैमरे पुलिस का अनुसंधान में अहम मददगार हथियार बन गया है। लेकिन तत्वरित कार्रवाई के लिए डॉग स्कवॉड की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। बासंवाड़ा जिले में वर्ष 2007 से डॉग स्कवॉड पुलिस का मददगार बना हुआ है। इस डॉग स्कवॉड में विदेशी नस्ल के खोजी श्वान हस्की, होजी एवं क्लेरिशा शामिल रही है, लेकिन बढ़ती उम्र एवं बीमारी ने इनकी जिन्दगी की डोर छीन ली।
एक साल से बेड़ा खाली
डॉग स्कवॉड का अंतिम सदस्य हस्की रही थी। वर्ष 23 अगस्त 2021 में मृत्यु उपरांत बासंवाड़ा का बेड़ा खाली है। नया खोजी श्वान नहीं आने से जिले में पुलिस के समक्ष संगीन वारदातों के दौरान तुरंत घटना स्थल से अपराधियों के साक्ष्य जुटाने में बड़ी समस्या आ रही है। हाल ही मुस्लिम कॉलोनी में विवाहिता शहनाज की चाकू घोंप कर हुई वारदात के दौरान भी पुलिस को डॉग स्कवॉड की कमी खली। स्वतंत्रता एवं गणतंत्र दिवस समारोह की सुरक्षा व्यवस्था की जांच परख के लिए भी उदयपुर स्कवॉड की मदद ली जा रही है।
खोजी श्वान ने खोले कई राज

वर्ष 23 अगस्त 2019 में दानपुर का सनसनीखेज मां-बेटे का डबल मर्डर कांड हस्की ने ही खोला था। इससे पूर्व डॉग स्कवॉड ने सुजीत हत्या कांड के साथ ही अन्य हत्या कांड, चोरी व डकैती की घटनाओं के राज भी खुले है। खोजी श्वान ने वर्ष 2013 में भी एक कातिल को दो किमी दूरी पर पहाड़ से दबोचा था। इसी प्रकार रूपम चेम्बर की चोरी का राज खोलने में भी खोजी श्वान मददगार रही थी। उस अवधि में हैंडलर के रूप में प्रतापसिंह व रमनलाल डॉग स्कवॉड की कमान संभाले हुए थे।
आवास अब बना डीएसटी कार्यालय

खोजी श्वानों को राजस्थान पुलिस ने दो स्टार यानी उपनिरीक्षक की रैंक दे रखी है। यह डॉग स्कवॉड के मुखिया के साथ ही थानेदार के रूप में भी जाने जाते है। यहां रिजर्व पुलिस लाइन में डॉग स्कवॉड के लिए करीब आठ लाख की लागत से विशेष भवन बना हुआ है। खोजी श्वान हस्की की मौत के बाद नया श्वान नहीं आने से आवास पर ताले लटक गए थे, लेकिन हाल ही इस आवास को जिला पुलिस की विशेष टीम डीएसटी को सौंप दिया गया। यहां आवास में खोजी श्वान के लिए कई सुविधाएं जुटाई गई। इसमें कूलर मुख्य है। इसी प्रकार इनके खाने के लिए विशेष फूड पैकेट मंगवाया जाता था, मासिक स्वास्थ्य परीक्षण होता था। खोजी श्वानों को पुलिस बेडे में शामिल करने से पहले बीएसएफ के ग्वालियर िस्थत कैम्प में भेजा जाता रहा है।
पड़ोसी जिलों में भी नहीं डॉग स्कवॉड

जिला मुख्यालय पर एक वर्ष पूर्व डॉग स्कवॉड होने पर खोजी श्वानों को जिले के साथ ही पड़ोसी जिले डूंगरपुर, प्रतापगढ़ के साथ ही राजसमंद तक भेजा जाता था। लेकिन एक वर्ष से जिले का ही डॉग स्कवॉड सूना है। यहां संगीन वारदातों एवं गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सुरक्षा के लिहाजे से जरूरत पड़ने पर उदयपुर से डॉग स्कवॉड बुलाया जता है। डूंगरपुर व प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय पर तो डॉग स्कवॉड की तैनाती ही नहीं हो सकी।
वर्जन..

जिला मुख्यालय पर डॉग स्कवॉड स्थापित है, लेकिन खोजी श्वान हस्की की मृत्यु के बाद स्कवॉड बंद है। जिले में जरूरत पड़ने पर उदयपुर या अन्य जिलों से डॉग स्कवॉड की मदद ली जाती है। जिले को डॉग स्कवॉड जल्द मिले, इसके प्रयास जारी है।
राजेश कुमार मीना, जिला पुलिस अधीक्षक, बांसवाड़ा

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