बांसवाड़ा : मुख्यमंत्री ने की थी बजट घोषणा, लेकिन अबतक नहीं शुरू हो सकी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला

बांसवाड़ा : मुख्यमंत्री ने की थी बजट घोषणा, लेकिन अबतक नहीं शुरू हो सकी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला

Avinash Chaturvedi | Publish: Sep, 09 2018 12:31:17 PM (IST) Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. लोगों को बाजार में मिलने वाले खाद्य उत्पाद कितने शुद्ध है इसकी समय पर जांच हो और लोगों का स्वास्थ्य बना रहे इसके लिए मुख्यमंत्री ने भले ही अपनी बजट घोषणा में प्रदेश में पांच नई खाद्य सामग्री परिक्षण प्रयोगशालाओं की घोषणा कर दी हो लेकिन अब तक इन प्रयोगशालाओं को अधिकारी (एेनालिस्ट) नहीं मिलने से ये शुरू नहीं हो सकी है। हालाकि भवन तैयार होने एवं उपकरण लगने के बाद भी इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने अपनी बजट घोषणा में बांसवाड़ा, भरतपुर, जालौर, चूरू एवं बीकानेर में नई खाद्य सामग्री परिक्षण प्रयोगशालाएं खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद इनको लेकर काम शुरू हो गया और भवन निर्माण एवं काफी उपकरण एवं स्टाफ भी लगा दिए गए। इसके बाद भी यहां पर खाद्य सामग्रियों की जांच का काम शुरू नहीं हो सका। पचास लाख हो गए खर्चबांसवाड़ा में खाद्य सामग्री परिक्षण प्रयोगशाला के निर्माण महात्मा गांधी चिकित्सालय परिसर में किया गया है।

इस पर करीब पचास लाख रुपए खर्च हो चुके है। यहां पर दो तीन जनों का स्टाफ भी लगा दिया गया है। इसके बाद भी एेनालिस्ट नहीं लगने से जांच का काम शुरू नहीं हो सका है। ये लगे उपकरण प्रयोगशाला के लिए लेमिनार, मॉफर, ऑटोक्लेव, डिजिटल क्लेव सहित करीब बीस प्रकार के उपकरण लगाए जा चुके है। इनमें से कुछ मशीने जापानी एवं अन्य देशों की भी बताई जा रही है। वहीं अभी भी कुछ मशीने आनी बाकी है। सरकार के पास नहीं है एेनालिस्टइसके पीछे एक कारण यह भी माना जा रहा है कि वर्तमान में प्रदेश में करीब ९ प्रयोग शालाएं संचालित हो रही है। सरकार के पास केवल इसके लिए सात एेनालिस्ट ही है। एेसे में नई प्रयोगशालाओं के लिए भी एेनालिस्ट नहीं मिल रहे है। जिस कारण इसमें देरी हो रही है। वर्तमान में उदयपुर, जोधपुर, जयपुर, अलवर, अजमेर एवं कोटा में खाद्य सामग्री परिक्षण के लिए प्रयोगशालाएं संचालित हो रही है। इसके अलावा कुछ एेनालिस्ट जयपुर मुख्यालय में लगे हुए है।

अभी होती है उदयपुर जांच
वर्तमान में बांसवाड़ा में लिए गए खाद्या सामग्री के नमूनों की जांच के लिए उदयपुर भेजे जाते है। एेसे में इन नमूनों की जांच की रिपोर्ट में वहां से समय पर नहीं मिल पा रही है। कम से कम जांच रिपोर्ट में १५ से २० दिन लग रहे है। एेसे में यदि यहां पर यह प्रयोगशाला शुरू हो जाती है तो नमूनों की जांच रिपोर्ट तुरंत मिल सकती है तथा त्योहारी सीजन में बिकने वाली मिलावटी एवं घटिया खाद्य सामग्री की बिक्री को भी रोका जा सकता है। प्रतापगढ़ एवं डूंगरपुर के नमूनों की भी होगी यहां जांचबांसवाड़ा के लिए खाद्य सामग्री के नमूने की जांच भले ही अभी उदयपुर हो रही हो लेकिन अगर यह प्रयोगशाला यहां शुरू हो जाती है तो प्रतापगढ़ एवं डूंगरपुर में लिए नमूनों की जांच का काम भी बांसवाड़ा में हो सकेगा।

इनका कहना है..
बांसवाड़ा में हर माह कम से कम एक दर्जन खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए लिए जा रहे है। जिनकी जांच के लिए उदयपुर लेब में भेजा जात है। वहां से जांच रिपोर्ट मिलने में कम से कम 15 से 20 दिन का समय लग रहा है। प्रयोगशाला शुरू हो तो इसकी रिपोर्ट जल्द आ सकती है। पिछले माह अगस्त में 12 एवं जुलाई में 19 नमूने विभिन्न जगहों से जांच के लिए लिए गए थे।
अशोक कुमार गुप्ता, खाद्य निरीक्षक बांसवाड़ा

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