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बांसवाड़ा

वागड़ में पहली बार 16 जुलाई को मनाएंगे कर्क संक्रांति

कर्क संक्रांति को उत्तरायण काल का अंत माना जाता है, क्योंकि सूर्य 6 महीने के लिए उत्तरायण और 6 महीने के लिए दक्षिणायन में रहते हैं।

बांसवाड़ाJun 26, 2024 / 06:06 pm

Santosh Trivedi

बांसवाड़ा . बैठक में अधिकारियों से चर्चा करते संभागीय आयुक्त। 

Kark Sankranti 2024: वागड़ में पहली बार कर्क संक्रांति का पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा। संभागीय आयुक्त डॉ. नीरज के पवन की पहल प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। संभागीय आयुक्त डॉ. नीरज के पवन की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें आयोजन की रूपरेखा तय कर अधिकारियों को दायित्व सौंपे गए।
डॉ.पवन ने कहा कि इस पर्व को महोत्सव के रूप में मनाया जाए और अधिकाधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जिला कलक्टर सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है। बैठक में जिला परिषद सीईओ वृद्धिचंद गर्ग, एडीएम अभिषेक गोयल, तहसीलदार दीपक सांखला, जिला शिक्षा अधिकारी मावजी खांट व शफब अंजुम, डीएसओ हजारीलाल अलौरिया, नगर परिषद आयुक्त मोहमद सुहैल , स्काउट सीओ दीपेश शर्मा व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।जिला कलक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने बताया कि कर्क संक्रांति पर्व आयोजन के लिए जिला परिषद के मुय कार्यकारी अधिकारी वृद्धिचंद गर्ग की अध्यक्षता में एक आयोजन समिति का गठन किया गया है।
इस समिति में उप वन संरक्षक, एसडीएम बांसवाड़ा, केवीके बोरवट के संभागीय निदेशक, पीडब्ल्यूडी के एसई, नगरपरिषद बांसवाड़ा के आयुक्त, मुय जिला शिक्षा अधिकारी, स्काउट सीओ, पर्यटन अधिकारी और समस्त विकास अधिकारियों को सदस्य नियुक्त किया गया है। उन्होंने समिति सदस्यों को कर्क रेखा पर स्थित पर्यटन स्थलों पर बोर्ड लगवाने और कर्क संक्रांति के सफल आयोजन के लिए तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश भी दिए हैं।

कर्क संक्रांति मनाएंगे

हम इस ब्रह्मांड में एक विशिष्ट भौगोलिक स्थिति पर निवास कर रहे हैं। समूचा भारत मकर संक्रांति मनाता है, परंतु कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण वागड़वासी मकर संक्रांति के साथ – साथ कर्क संक्रांति भी मनाने जा रहे हैं ।डॉ . नीरज के पवन, संभागीय आयुक्त

कर्क संक्रांति को उत्तरायण काल का अंत

कर्क संक्रांति को उत्तरायण काल का अंत माना जाता है, क्योंकि सूर्य 6 महीने के लिए उत्तरायण और 6 महीने के लिए दक्षिणायन में रहते हैं। कर्क संक्रांति से दक्षिणायन की शुरुआत होती है, जो मकर संक्रांति तक चलती है। दक्षिणायन के समय रातें धीरे-धीरे लंबी होना शुरू हो जाती हैं और दिन छोटे होने लगते हैं। इस दौरान वर्षा, शरद, हेमंत ये तीन ऋतुएं आती हैं।
यादवेंद्र द्विवेदी, ज्योतिषी

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