बांसवाड़ा : पत्रिका पहल लाई रंग, ‘जीत’ आखिर जीत गया जिन्दगी की जंग

बांसवाड़ा : पत्रिका पहल लाई रंग, ‘जीत’ आखिर जीत गया जिन्दगी की जंग

Ashish vajpayee | Publish: Sep, 11 2018 03:57:50 PM (IST) Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. एक वर्ष का जीत अब जिन्दगी की जंग जीत चुका है। महज एक वर्ष की उम्र में दिल में छेद सरीखी गंभीर बीमारी से जूझने वाला बच्चा अब पूर्णतया स्वस्थ्य है और घर में मां की गोद में किलकारियां ले रहा है। इस संबंध में आरसीएचओ डॉ. नरेंद्र कोहली ने बताया कि राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार के बाद राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने बच्चे के घर जाकर स्क्रीनिंग की। जिसमें बच्चे के दिल में छेद होने की बात समाने आई। इसके बाद कागजी कार्रवाई कर बच्चे को बेहतर उपचार के लिए उदयपुर रैफर किया गया। जहां बच्चे का ऑपरेशन हुआ और अब बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है। इसमें विभाग की डॉ. प्रिया कोठारी एवं अन्य चिकित्सकों ने सहयोग किया।

21 हजार की दी सहयोग राशि
बच्चे के ऑपरेशन के बाद स्पर्श सेवा संस्थान की ओर से बच्चे की मां को 21 हजार रुपए का चेक दिया गया। इस संबंध में संस्थान की स्वाती जैन ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व में ही निर्धारित किया गया था कि बच्चे के ऑपरेशन के बाद मदद को करेंगे।

पत्रिका ने की थी पहल
जीत के उपचार को लेकर राजस्थान पत्रिका की ओर से 22 अगस्त के अंक में शीर्षक ‘दिल का छेद भरने रहनुमा मिल जाए तो जीत जिंदगी की जंग जीत जाए’ से प्रकाशित किया गया था। जिसके बाद जिले के कई भामाशाह आगे आए और जीत के परिजनों की मदद की।

2936 गर्भवतियों की हुई जांच
बांसवाड़ा. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सोमवार को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में गर्भवतियों की निशुल्क सेहत जांची गई। इस मौके पर विशेषज्ञों ने खान पान संबंधित सलाह भी दी। यहां पर जच्चा-बच्चा को सुरक्षित रखने के लिए काफी हद तक मदद मिल रही है। जिलेभर में शुक्रवार को 2936 गर्भवतियों की जांच की गई। मातृत्व अभियान के साथ ही पोषण मेला भी लगाया गया। उल्लेखनीय है कि सिंतंबर माह पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसी संदर्भ में मातृत्व अभियान में पोषण संबंधित आईईसी भी लगाई गई। मेले में धात्री महिलाएं और किशोरियां भी शामिल हुई। जिन्हें पोषण संबंधित सलाह दी गई। केलों का वितरण किया गया।

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