Interview.... बेटियों को बांसवाड़ा से कवयित्री अनामिका अंबर का संदेश, चट्टान बन जाओ, जिससे तूफान बच के चलता है...

समसामयिक विषयों पर धारदार रचनाओं से अपनी काव्य यात्रा को नए सोपान दे रही कवयित्री अनामिका जैन अंबर का देश की बेटियों से कहना है कि खून अंदर कहीं उबलता है, बाज चिडिय़ा को जब मसलता है, लड़कियों वो चट्टान बन जाओ, जिससे तूफान बच के चलता है...।

By: deendayal sharma

Updated: 08 Dec 2019, 12:52 PM IST

Banswara, Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. समसामयिक विषयों पर धारदार रचनाओं से अपनी काव्य यात्रा को नए सोपान दे रही कवयित्री अनामिका जैन अंबर का देश की बेटियों से कहना है कि खून अंदर कहीं उबलता है, बाज चिडिय़ा को जब मसलता है, लड़कियों वो चट्टान बन जाओ, जिससे तूफान बच के चलता है...।बांसवाड़ा यात्रा के दौरान राजस्थान पत्रिका से बातचीत में अनामिका ने देश में बढ़ती दुष्कर्म और महिला अपराध की घटनाओं के संबंध में कहा कि बेटियों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनने चाहिए। नारी को नारी ही कहा जाए। उन्होंने बेटियों को संबोधित कर कहा कि अब वह समय नहीं है कि कृष्ण आकर चीर बढ़ाएंगे। भीष्म नहीं हैं कि उन्हें छाले दिखाएंगे। गलत साइट्स पर लगे प्रतिबंध उन्होंने कहा कि हर चीज के उपयोग व दुरुपयोग बराबर है। सोशल मीडिया पर कुछ साइट्स बहुत लिमिटेड और नियमानुसार होनी चाहिए। आज हर वीडियो सहज उपलब्ध हो रहा है। यह बंद होना चाहिए। कहीं न कहीं सोशल मीडिया पर गलत साइट्स ऐसी घटनाओं के लिए कारण हैं।कविता के लिए सोशल मीडिया जरूरी अंबर ने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग कविता को जिन्दा रखने के लिए बहुत जरूरी है। इसका कारण यह है कि नई पीढ़ी के बच्चों को यदि मोबाइल पर और सोशल मीडिया पर कविता मिल रही है तो स्पष्ट है कि कविता उन तक पहुंच रही है। नई पीढ़ी तक कविता पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया बहुत जरूरी है।

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