बांसवाड़ा : पतंगबाजी के चक्कर में बालगृह की छत से गिरा बालक, नाली में बेहोश पड़ा रहा, कार्मिकों को भनक तक नहीं लगी

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By: deendayal sharma

Updated: 19 Jan 2019, 03:34 PM IST

बांसवाड़ा. शहर के कबीर मंदिर के पीछे संचालित बालगृह का 10 वर्षीय बालक शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे भवन की छत से गिरकर गंभीर घायल हो गया। बालक के गिरने की संचालक व वहां कार्यरत कार्मिकों को भनक तक नहीं लगी। करीब पन्द्रह-बीस मिनट तक बच्चा नाली में ही बेहोश पड़ा रहा। बाद में क्षेत्रवासियों की सूचना पर प्रभारी चेते और बच्चे को महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया है। उसके चेहरे व सिर पर गंभीर चोट है। हादसे पर बालगृह की व्यवस्थाओं पर भी प्रश्न चिह्न लग गए हैं। जानकारी अनुसार अरविंद बालगृह की छत पर खेल रहा था और एवं पतंगबाजी कर रहा था। इसी दौरान अचानक वह छत से नीचे आ गिरा। करीब 12 से 14 फीट ऊंची छत से नीचे गिरने से उसके सिर पर गंभीर चोट आई। इससे वह बेहोश हो गया। काफी देर तक वहीं पड़ा रहा। इसके बाद निकट ही संचालित दुकान के मालिक पीयूष जैन व कॉलोनी के बच्चों ने उसे देखा तब बालगृह कार्मिकों को सूचना दी। इस पर बच्चे को एमजी चिकित्सालय पहुंचाया गया। सूचना पर समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक दिलीप रोकडिया भी मौके पर पहुंचे और बच्चे की उपचार संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि फिलहाल बच्चा ठीक है। उपचार के साथ ही विशेष देखरेख का प्रबंध किया है।

क्षेत्रवासियों पर बरसे अधिकारी
एमजी चिकित्सालय में बच्चे का हाल-चाल जानने कॉलोनी निवासी पहुंचे और बाल गृह प्रभारी के रवैये को लेकर कुछ बोलते इससे पहले ही समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक दिलीप रोकडिया उन पर ही बरस पड़े। रोकडिय़ा का कहना था कि लोग बेवजह प्रभारी पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि, कॉलोनीवासियों का कहना था कि अधिकारी उनकी बात ही नहीं सुनना चाहते और मामले में बाल गृह प्रभारी का पक्ष ले रहे हैं। जबकि, बालगृह में अव्यवस्थाएं हैं। कॉलोनीवासियों ने यह भी कहा कि जब हादसे की सूचना प्रभारी को दी तब भी उन्हें ही खरी-खोटी सुनाई गई। उन्होंने बाल गृह की व्यवस्थाओं की जांच की आवश्यकता जताई। उल्लेखनीय है कि गत दिनों बालगृह के बच्चे हाथ-पैर पर कटाव व संक्रमण का शिकार होकर चिकित्सालय पहुंचे थे।

35 बच्चे हैं निवासरत
समाज कल्याण विभाग की देखरेख में संचालित इस बाल गृह में वर्तमान में 35 अनाथ व बेसहार बच्चे रह रहे हैं। इन बच्चों की देखरेख, भोजन, आवास आदि की व्यवस्था संस्था की ओर से की जाती है। इसके लिए प्रति बालक करीब 2000 रुपए प्रतिमाह का भुगतान संस्था को होता है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अनुदानित राशि तीन वर्ष तक बेहतर सुविधा पर देय है।

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