बांसवाड़ा : साक्षर भारत योजना पर ताला, कैसे मिटे निरक्षरता का अंधियारा, प्रदेशभर में ठप पड़ी हुई है साक्षरता की गतिविधियां

बांसवाड़ा : साक्षर भारत योजना पर ताला, कैसे मिटे निरक्षरता का अंधियारा, प्रदेशभर में ठप पड़ी हुई है साक्षरता की गतिविधियां

Ashish Bajpai | Publish: Sep, 08 2018 02:15:21 PM (IST) Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. प्रदेशभर में छह माह से लोक शिक्षा केन्द्रों पर ताले जड़े हैं, जिससे अकेले बांसवाड़ा जिले में शिक्षा की ज्योत जला रहे 564 प्रेरक बेरोजगार हो गए हैं। न निरक्षरों को कोई पढ़ाने वाला है और न ही इन केन्द्रों को कोई संभालने वाला। इन केन्द्रों को स्थापित करने पर खासा खर्च किया गया था। अब साक्षर भारत योजना बंद हो चुकी है और नई योजना का कोई अता-पता नहीं। ऐसे में साक्षरता से जुड़े स्टाफ के पास कोई काम भी नहीं है। जिले की 346 ग्राम पंचायतों में से 306 लोक शिक्षा केन्द्र हैं। प्रत्येक पर दो-दो प्रेरक व सहयोगी लगाए गए। कुल 614 स्वीकृत पदों के मुकाबले 564 महिला-पुरुष प्रेरक कार्यरत थे। इन्हें दो-दो हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाता था। मार्च से इनका मानदेय बंद हो गया और केन्द्र के द्वार भी।

नाम लिखने काबिल ही हुए साक्षर
साक्षरता एवं सतत् शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2011 में एक सर्वे करवाया था। बांसवाड़ा जिले में 4 लाख 69 हजार 547 निरक्षर सामने आए थे। ऐसेही आंकड़े प्रदेश के अन्य जिलों में भी थे। इस पर देश भर में वर्ष 2012 से 18 तक साक्षर भारत अभियान चलाकर करोड़ों रुपए फूंके गए। प्रतिवर्ष मार्च और अगस्त में निरक्षरों के लिए बुनियादी साक्षरता परीक्षा होती रही, जो गत 25 मार्च को अंतिम बार हुई थी। इन परीक्षाओं के माध्यम से बांसवाड़ा जिले में मार्च 2018 तक कुल साक्षरों का आंकड़ा 389463 है। जो 82.94 प्रतिशत है। अब भी 80084 महिला-पुरुष साक्षर होने से वंचित बताए जा रहे हैं।

हस्ताक्षर करने और नाम लिखने लायक ही बने
ये साक्षरत लोग केवल हस्ताक्षर करने लायक या नाम लिखने लायक ही बन पाए। इसमें से ए और बी ग्रेड वालों को एनआईओएस नोएडा ने प्रमाण पत्र जारी किए, जबकि सी ग्रेड वालों को यह परीक्षा पुन: देने के लिए रोका गया।

प्रेरक आज मनाएंगे काला दिवस
राजस्थान महात्मा गांधी सार्वजनिक पुस्तकालय एवं वाचनालय कार्मिक प्रेरक संघ ने साक्षरता दिवस को काला दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया है। पदाधिकारियों ने बताया कि प्रेरक बेरोजगारी से आहत है। पिछली सेवाओं का चार माह का मानदेय भी बकाया है। सरकार ने प्रेरकों के साथ धोखा किया है, जिसे बर्दाश्त अब नही किया जाएगा।

इनका कहना
वर्तमान में कार्यक्रम बंद है। आगे गतिविधियों के संचालन को लेकर अभी तक कोई निर्देश नहीं होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा। उच्च स्तर के निर्देशानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
उमेश अधिकारी, जिला साक्षरता अधिकारी, बांसवाड़ा

साक्षर भारत अभियान बंद पड़ा हुआ है। पुस्तकालय का संचालन भी नहीं हो रहा है। पूरे राज्य में 18 हजार से अधिक प्रेरक बेरोजगार हैं। सरकार को जल्द ही साक्षरता की गतिविधियों का नियमित संचालन करने के साथ प्रेरकों को स्थायी करना चाहिए।
देवेंद्र त्रिवेदी, जिलाध्यक्ष प्रेरक संघ

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