महात्मा गांधी अस्पताल के हाल : उमस के माहौल में शिशु वार्ड के आधे पंखे बंद, बच्चे और परिजन बेहाल

महात्मा गांधी अस्पताल के हाल : उमस के माहौल में शिशु वार्ड के आधे पंखे बंद, बच्चे और परिजन बेहाल
महात्मा गांधी अस्पताल के हाल : उमस के माहौल में शिशु वार्ड के आधे पंखे बंद, बच्चे और परिजन बेहाल

Varun Kumar Bhatt | Publish: Aug, 23 2019 12:14:25 PM (IST) Banswara, Banswara, Rajasthan, India

MG Hospital Banswara : शिशुओं का यों रोना खुशी नहीं, दे रहा दर्द रोना ये कि प्रबंधन का दिल नहीं पसीजता

बांसवाड़ा. महात्मा गांधी चिकित्सालय के प्रथम तल पर संचालित शिशु वार्ड। वैसे इस वार्ड में बच्चे के जन्म के बाद उसका रोना हर किसी के चेहरे पर खुली लाता है लेकिन उमस की मार से बेहाल होकर उनके विलाप की वार्ड में गूंज परिजनों के चेहरे पर दर्द के भाव भरे हुए है। वे बच्चे को राहत के हरचंद प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन के कर्ताधर्ताओं के दिल नहीं पसीज रहे। वार्ड के आधे पंखे बंद हैं और कूलर उमस के माहौल में बेअसर है, लेकिन पंखे ठीक करने की किसी को सुध नहीं है। पत्रिका रिपोर्टर से बुधवार रात और गुरुवार दोपहर तकरीबन दो घंटे वार्ड में गुजार कर बच्चों की तकलीफ को खुद अनुभव किया।

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बेटे बने मां का सहारा
95 वर्षीय बुजुर्ग मां को अस्पताल लेकर पहुंचे बेटों के लिए वार्ड तक जाना आफत बन गया। स्ट्रेचर न मिल पाने के कारण दो बेटों ने उनकी मां नाता पत्नी भगवान को हाथों में उठाया और ओपीडी से तकरीबन 400 मीटर दूर महिला (मेडिसिन) वार्ड तक ले गए। आसोड़ा निवासी बुजुर्ग नाता को वार्ड ले जाना दोनों बेटों के लिए टेढ़ी खीर बन गया।

बच्चे को नसीब नहीं हुआ स्टे्रचर
नाता की तरह ही कुछ हाल एक बच्चे का भी हुआ।पैर में फ्रैक्चर की समस्या से पीडि़त बच्चे को प्लास्टर चढ़ाने के बाद स्ट्रेचर नसीब नहीं हुआ। जिसे वार्ड में पहुंचाने के लिए उसके घर के तीन सदस्यों ने गोद में लेकिर उसे अस्थि वार्ड तक पहुंचाया।

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गीला कपड़ा ही बचा सहारा, बार-बार पोंछा
वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजनों हाथों से पंखा कर या गीले कपड़े से बच्चों को पोंछ कर उन्हें राहत प्रदान कर रहे हैं। बच्चों के साथ-साथ परिजनों के लिए भी परेशानी का सबब है। गर्मी से निजात दिलाने के लिए गीले कपड़े से बच्चे को पोछती मां।

यह कहना है नर्सिंग अधीक्षक का
शिशु वार्ड में गर्मी से राहत के लिए कूलर संचालित हैं। जो पंखे खराब हैं उन्हें मरम्ॅमत के लिए भेजा गया है। अस्पताल में स्ट्रेचर और कार्मिकों की सुविधा उपलब्ध है। कुछ लोग स्वयं की इच्छा से मरीजों को बिना स्ट्रेचर ले जाते हैं।
नवनीत सोनी, नर्सिंग अधीक्षक, महात्मा गांधी अस्पताल, बांसवाड़ा

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