उदयपुर सांसद ने संसद में उठाई मांग : शहादत की निशानी है मानगढ़ धाम, इसे राष्ट्रीय गौरव का दर्जा मिले

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By: Ashish vajpayee

Published: 20 Jul 2018, 01:06 PM IST

बांसवाड़ा/नई दिल्ली. बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय दर्जा दिए जाने की मांग संसद में गुरुवार को उठी। उदयपुर के लोकसभा सांसद अर्जुनलाल मीणा ने गुरुवार को शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। उदयपुर के सांसद अर्जुन लाल मीणा ने मानगढ़ के ऐतिहासिक महत्व को बताते हुए कहा कि यह इलाका शहीदों की भूमि है। गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा से सटे इस इलाके में साल 1931 में गोविन्द गुरु के नेतृत्व में लगभग 1500 आदिवासी शहीद हुए थे। इसका इतिहास काफी पुराना रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए इसे राष्ट्रीय गौरव का स्थान का दर्जा दिया जाए। राजस्थान सरकार की ओर से लगभग दस करोड़ रुपए लगाकर वहां शहीद स्मारक बनाया गया है। गुजरात सरकार ने भी इलाके के विकास के लिए वहां कुछ काम किए हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने गुजारिश की कि इसे राष्ट्रीय गौरव का दर्जा दिया जाए।

नगर परिषद कार्मिकों को अब तक नहीं मिल पाया सातवां वेतनमान
बांसवाड़ा. बांसवाड़ा नगर परिषद में सभापति और उप सभापति के बीच मतभेद, आयुक्त पर काम नहीं करने के आरोप, पार्षदों की अपने वार्डों में काम नहीं होने के कारण आए दिन हो रहे विवाद के बीच यहां कार्यरत कर्मचारियों को उनका जायज अधिकार नहीं मिल रहा है। परिवार के मुखियाओं की लड़ाई में कर्मचारी ***** रहे हैं। हालात यह है कि परिषद कर्मचारियों को अब तक सातवां वेतनमान तक नहीं मिल पाया है, जबकि अन्य विभागों में कार्मिकों को एरियर तक का भुगतान हो चुका है। जानकारी के अनुसार नगर परिषद के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान नहीं मिला है। नगर परिषद में करीब तीन सौ से अधिक कर्मचारी स्थायी हैं। इनमें सबसे अधिक 247 सफाई कर्मचारी हैं। शेष मंत्रालयिक और अन्य संवर्ग के कर्मचारी हैं। इन कार्मिकों की सातवें वेतनमान संबंधी फाइलें अब तक अटकी हुई हैं। फिक्सेशन भी नहीं हुआ है। इसके चलते इन्हें वेतनमान का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सिर्फ आश्वासन मिला
कर्मचारियों की ओर से दो-तीन माह पहले कलक्टर को ज्ञापन देकर इसकी मांग की गई थी, जिसमें लेखा अधिकारी के माध्यम से कार्मिकों के वेतन स्थिरीकरण आदि कराने की मांग प्रमुख थी। इस पर तत्समय कलक्टर ने लेखा अधिकारी नियुक्त कर वेतनमान संबंधी कार्रवाई पूर्ण कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन ही साबित हुआ।

जल्द हो लागू
राजस्थान नगरपालिका फैडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलनयन आचार्य का कहना है कि संगठन की राज्य सरकार से वार्ता के बाद वेतन स्थिरीकरण और अन्य प्रक्रिया पूर्ण करने की शक्तियां आयुक्त को दे दी गई थीं, लेकिन अब तक फाइलें अटकी हुई हैं। उन्हें नए वेतनमान के अन्तर्गत एक रुपए का भी अब तक लाभ प्राप्त नहीं हुआ है, जबकि अन्य विभागों में उनके समकक्ष अधिकारी-कर्मचारियों को एरियर तक का भुगतान हो चुका है। उनका कहना रहा कि अगस्त से दिसम्बर तक की अवधि में कई कर्मिक सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वेतनमान लागू नहीं होने से वे इसके सभी परिलाभ से भी वंचित रह जाएंगे।

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