सवा करोड़ की लागत से एमजी अस्पताल में बन रहे नए मेल-फिमेल वार्ड, लेकिन वहां तक जाने के रास्ते का ठिकाना नहीं

Mahatma Gandhi Hospital : निर्माण एजेंसी एनआरएचएम बेपरवाह, एप्रोच के लिए अब और लगेंगे 38 लाख, तब तक बनने के बाद भी नाकारा रहेंगे एमजी अस्पताल के नए मेल-फिमेल वार्ड


बांसवाड़ा. मरीजों की बढ़ती संख्या से सिकुड़ते बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में 1.25 करोड़ की लागत से नए मेल-फिमेल वार्ड तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनका इस्तेमाल शुरू कराने के लिए 38 लाख का अतिरिक्त खर्चा करना पड़ेगा। यही नहीं, जब तक यह पैसा नहीं मिलेगा और काम नहीं होगा, तब तक सवा सौ करोड़ का काम का कोई मायने नहीं रहेगा। दरअसल, सिस्टम और निर्माण एजेंसी के गैरजिम्मेदाराना रवैए से इन वार्डों में पहुंच की राह ही नहीं बनी है। यहां ट्रोमा वार्ड के ऊपर प्रथम तल पर मेल और शिशु वार्ड के ऊपर बनाए जा रहे फिमेल, दोनों वार्डों के लिए 2017-18 में स्वीकृति हुई, जिसका निर्माण मार्च, 2020 तक पूरा करना है। कार्यकारी एजेंसी एनआरएचएम के अधीनस्थ अधिकारी ठेकेदार फर्म द्वारा सत्तर फीसदी काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इसमें प्रवेश के रास्ते की पुरानी प्लानिंग ही निरस्त कर दी गई। फिर अतिरिक्त कार्ययोजना बनाकर एनआरएचएम ने एप्रोच के लिए लाखों का नया प्लान बनाकर प्रस्तावित कर दिया। अब इसकी मंजूरी पर कॉरिडोर बनाकर रास्ता निकलेगा, जिसमें महीनों लगेंगे। इस बीच, अभी हालात यह है कि प्रथम मंजिल पर परिसर तो बन रहे हैं, लेकिन फिलहाल मुआयने के लिए भी लकड़ी की सीढिय़ों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

दिल्ली से आई टीम ने नकारा था प्लान : - एनआरएचएम के सहायक अभियंता अशोक गुप्ता के अनुसार नए मेल-फिमेल वार्ड का मुआयना कुछ माह पहले दिल्ली से आई टीम ने किया था। उस समय रास्ते के सवाल पर पीआईपी के मुताबिक बताया गया कि यहां ऑपरेशन थियेटर से रास्ता निकाला जाएगा, जिससे सीधे दूसरे वार्डों से पहुंच मुमकिन हो। टीम ने उसे खारिज कर दिया। तब से रास्ते का मामला पसर गया। उसके बाद कॉरिडोर बनाकर रास्ता देने का 38 लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। दूसरी ओर, पीएमओ डॉ. नंदलाल चरपोटा की मानें, तो इन वार्डों के लिए लिफ्ट के करीब से कॉरिडोर निकालकर मार्ग बनाना प्रस्तावित है, लेकिन इस बारे में कोई कुछ बता नहीं पा रहा है।

ठेकेदार फर्म भी कह चुकी काम अनुपयोगी : - मामले में ठेकेदार फर्म के सुशील मित्तल का कहना है कि पहले सिंगल टेंडर करीब सवा करोड़ का था, जिसमें एप्रोच शामिल थी। एप्रोच केंसल कर दी गई। तभी से पत्र व्यवहार कर फर्म ने स्पष्ट कर दिया कि वार्डों का निर्माण पूरा होने भी अनुपयोगी रहेगा। सीएमएचओ को भी लिखा। अब शायद दूसरा टेंडर एप्रोच के लिए करने की तैयारी है। दूसरी ओर, सिविल विंग के अधिशासी अभियंता इससे अनभिज्ञता जताकर पूरी तरह पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि सवा करोड़ की लागत के बाद अब 38 लाख की चपत सरकार को अतिरिक्त लगेगी। इस मामले में सिविल विंग एनआरएचएम के अधिशासी अभियंता आरके फुलवारिया ने कहा कि एमजी अस्पताल के निर्माण कार्यों का मुआयना किया था, लेकिन मेल-फिमेल वार्ड के निर्माण में एप्रोच को लेकर कोई जानकारी नहीं है। देखते हैं। कुछ करेंगे।

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deendayal sharma Desk
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