निकाय चुनाव पर नई अधिसूचना से दावेदार असमंजस में, ‘पार्षद का चुनाव लड़ें या सीधे सभापति के लिए जुगाड़ करें’

Nagar Parishad Banswara : राजस्थान निकाय चुनाव 2019, किसी ने बताया अच्छी पहल किसी ने तमाशा

बांसवाड़ा. राज्य सरकार की ओर से पहले अप्रत्यक्ष चुनाव कराने और इसके बाद सभापति बनने के लिए पार्षद होने की अनिवार्यता को समाप्त करने के निर्णय से आगामी निकाय चुनाव में सभापति बनने के लिए दावेदारी कर रहे नेताओं के चेहरे मुरझा गए हैं। अधिसूचना के बाद कई दावेदार असमंजस में भी हैं कि वे पार्षद का चुनाव लड़ें या सीधे सभापति के लिए अभी से जुगाड़ करें। इधर, नई अधिसूचना के बाद राजनीतिक दलों की मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई है। राज्य सरकार ने तीन दिन पहले काफी मंथन के बाद 2009 की तरह सभापति के सीधे चुनाव कराने का निर्णय वापस ले लिया था। अब सभापति बनने के लिए पार्षद होने की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया है। इससे भाजपा और कांगे्रस में सभापति पद के लिए दावेदारी जताने वालों के चेहरे उतर गए हैं। हालांकि बांसवाड़ा नगर परिषद में सभापति पद के लिए लॉटरी प्रक्रिया होनी शेष है। इसके बाद ही नई चुनावी गणित सामने आएगी। गुरुवार को यह चर्चा भी रही कि नई अधिसूचना के अनुसार चुनाव को लेकर सभापति के दावेदार मेहनत भी करें, लेकिन ऐनवक्त पर पार्टी स्तर पर सभापति पद के लिए चेहरा बदल दिया गया तो उस मेहनत पर पानी फिर जाएगा। यह भी चर्चा रही कि चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने पर निर्दलीयों की पौ-बारह हो जाएगी।

यह सामने आई प्रतिक्रिया : - सरकार के निर्णय पर पूर्व सभापति राजेश टेलर ने कहा कि अधिसूचना जारी की गई है तो सर्व मान्य होनी चाहिए। हालांकि इसके संबंध में विस्तृत जानकारी लेने के बाद ही वे कुछ अधिक कह पाएंगे। कांगे्रस के प्रदेश सचिव जैनेन्द्र त्रिवेदी ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष चुनाव का वादा किया था। इसका स्वरूप बदला है। नई प्रक्रिया में कोई भी व्यक्ति बिना पार्षद सभापति बन सकेगा। नामांकन के लिए पार्षद का प्रस्तावक व समर्थक होना जरूरी होगा। इधर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रमेशचंद्र पंवार ने कहा कि निकाय चुनाव के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। इससे खरीद-फरोख्त को बढ़ावा मिलेगा। येनकेन सरकार की कोशिश यही है कि मामला कोर्ट में चला जाए तो अभी चुनाव निरस्त हो जाएं। पूर्व उपाध्यक्ष भगवतपुरी ने कहा कि सरकार का निर्णय नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है। यह विधि सम्मत भी नहीं है। चुने गए पार्षद की बजाए बाहरी व्यक्ति सभापति बनें, यह चुनाव प्रक्रिया का मखौल उड़ाने जैसा है। हो सकता है कि सरकार चुनाव टालना चाह रही है, ताकि उसके खिलाफ जनादेश नहीं आए।

जिला परिषद सदस्य ने दिया इस्तीफा : - निकाय चुनाव से ठीक पहले जिला परिषद के वार्ड संख्या दस गढ़ी से कांगे्रस की सदस्य इंदिरा पंड्या ने पार्टी की सक्रिय सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। कांगे्रस जिलाध्यक्ष के मार्फत प्रदेशाध्यक्ष को भेजे त्यागपत्र में पंड्या ने कहा कि पारिवारिक विषमताओं, कांगे्रस की वर्तमान चिंताजनक स्थितियों यथा दिशाविहीन माहौल, आपसी कलह और वैमनस्यता से क्षुब्ध होकर वे कांगे्रस की सक्रिय सदस्यता से त्यागपत्र दे रही हैं। इधर, सूत्र बताते हैं कि पंड्या जिस वार्ड से जिला परिषद सदस्य बनीं, वह वार्ड अब परतापुर-गढ़ी नगरपालिका क्षेत्र में आ गया है। उनका गृहवार्ड 22 भी महिला सामान्य है। ऐसे में माना जा रहा है कि वे निकाय चुनाव लड़ेंगी, जिसके चलते उन्होंने त्यागपत्र दिया है। गौरतलब है कि इसी वार्ड में कांगे्रस के पूर्व विधायक रमेश पंड्या भी आते हैं।

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Varun Bhatt
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