बांसवाड़ा : बच्चों में बढ़ा तैराकी के गुर सीखने का रुझान, रंग लाने लगा है ‘आओ तराशें तैराक’ अभियान

बांसवाड़ा : बच्चों में बढ़ा तैराकी के गुर सीखने का रुझान, रंग लाने लगा है ‘आओ तराशें तैराक’ अभियान

Ashish vajpayee | Publish: Jun, 14 2018 12:42:45 PM (IST) Banswara, Rajasthan, India

राजस्थान पत्रिका अभियान से मिला प्रोत्साहन

बांसवाड़ा. जो कभी पानी में उतरने से डरते थे वह भी अब तैराक बनने का सपना देखने लगे हैं। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन पानी में छपाक-छई का मजा लेने और तैराकी के गुर सीखने के लिए इन दिनों स्वीमिंग पुल में नन्हे-मुन्हों के साथ उनके अभिभावकों की उपस्थिति बढ़ गई है। राजस्थान पत्रिका की ओर से चलाए जा रहे ‘आओ तराशें तैराक’ अभियान के बाद कई अभिभावकों ने भी अपने बच्चों को तरणताल पर भेजना शुरू कर दिया है। उनका मानना है कि यदि इसी तरह का प्रोत्साहन सरकार और जिला प्रशासन की ओर से दिया जाए तो यह बच्चे आने वाले समय में अच्छे तैराक बन सकते हैं।

तरणतालों की कमी
ऐसा नहीं है कि अभिभावक बच्चों को अच्छा तैराक बनाना नहीं चाहते, लेकिन तैराकी सीखाने के लिए कहां भेजे यह समस्या बनी रहती है। इसको देखते हुए निजी विद्यालय संचालकों सहित एक-दो स्थान पर कुछ समय से तैराकी का प्रशिक्षण देने का प्रयास शुरू किया है। एक-दो साल से बच्चों का रुख तैराकी की ओर बढऩे से समर केंप में भी इसको जोड़ दिया। अंकुर शिक्षण संस्थान के सचिव शैलेन्द्र सराफ ने बताया कि राजस्थान पत्रिका की ओर से चलाए जा रहे अभियान के बाद दो-दो साल तक के बच्चों में तैराकी के प्रति जागरुकता जगी है एवं वह इस बारे में पूछताछ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में कई अच्छे तैराक हैं यदि उनको और बेहतर तरीके से प्रशिक्षण दिया जाए तो वह अच्छे ट्रेनर बन सकते हैं। जिले में पानी की कोई परेशानी नहीं है जिससे यहां बहुत संभावनाएं हैं।

जिला प्रशासन भी कराएगा माही नदी के पानी की जांच
बांसवाड़ा. केंद्रीय जल आयोग की ओर से सेंटर फोर साइंस एण्ड एनवायरनमेंट की ताजा रिपोर्ट में माही नदी के जल में खतरनाक स्तर तक मिले क्रोमियम, शीशा और आयरन जैसे तत्वों से मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होने का खुलासा होने के बाद जिला प्रशासन ने भी इसकी जांच स्थानीय स्तर पर कराने का मानस बनाया है। जिला कलेक्टर भगवती प्रसाद ने बताया कि जांच रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर पानी पीने योग्य है या नहीं और इसमें कौनसे तत्व हैं इसकी जांच स्थानीय स्तर पर भी करवाने के प्रयास किए जाएंगे। यदि इसकी अधिकता है और पीने योग्य नहीं है तो इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने रविवार को प्रथम पेज पर ‘माही के पानी में जानलेवा रासायनिक तत्व की भरमार’ शीर्षक से समाचार का प्रकाशन कर इसका खुलासा किया था।

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