कोटा में बच्चों की मौत के मामले के बीच बांसवाड़ा से आई यह बड़ी खबर, अस्पताल के रेकॉर्ड से गायब हो रहे मासूम...

Mahatma Gandhi Hospital Banswara, Children Died In Kota : खुलासा: एमजी अस्पताल के रेकॉर्ड से मासूम गायब, भर्ती करने की प्रक्रिया ही कर दी गोल, देखते-देखते गुजर गया बच्चा तो कहीं नाम तक नहीं

By: deendayal sharma

Published: 03 Jan 2020, 09:09 AM IST

दीनदयाल शर्मा/बांसवाड़ा. प्रसव के बाद कम वजनी और गंभीर हाल पर गांवों-कस्बों से जिला मुख्यालय के महात्मा गांधी अस्पताल लाए जा रहे बच्चे रेकॉर्ड से गायब हो रहे हैं। बात अजीब भले ही लगे, लेकिन यह हकीकत है। असल में जन्म के साथ विकृति के शिकार बच्चों के उपचार के लिए लिए आधुनिक सुविधायुक्त एसएनसीयू वार्ड तो है, लेकिन उसमें केवल आंकड़ेबाजी हो रही है। बाहर से आने वाले गंभीर बच्चों को रेकार्ड पर लिए बगैर या तो सीधे रवाना किया जा रहा है या मौत के अंदेशे पर उपचार से सरवाइवल होने तक कागजों में नहीं बताया जा रहा। फिर मौत (Children Death In Kota) होने पर उसे सौंपकर पीछे आंकड़ा बढ़ नहीं जाए, इसलिए खेल हो रहा है। नतीजा यह कि मौतों के आंकड़े कम बताने की मंशा से चल रहे इस सिलसिले में कई अभिभावक गंभीर बच्चों को उदयपुर या अहमदाबाद तक नहीं ले जा पा रहे और यहीं उसे खो रहे हैं।

यों चल रहा है खेल : - वर्ष 2019 में एमजी अस्पताल में 180 बच्चों की मौत हुई। (Children Death In Banswara) साल के उत्तराद्र्ध से ही आंकड़ा और नहीं बढ़े, इसलिए खेल शुरू हुआ। अस्पताल के ही सूत्र बताते हैं कि गंभीर बच्चे रिस्क होने से यहां एडमिशन नहीं दिया जा रहा। कोई कागज बन भी जाए, तो शव ले जाते ही वह नष्ट कर दिया जाता है। एसएनसीयू वार्ड में बच्चों की संख्या 25 के आसपास रखी जाती है। इसमें सिजेरियन डिलेवरी पर थोड़ा-बहुत वजन ऊपर-नीचे होने वाले बच्चों को दाखिला करते है, या गांवों-कस्बों से रैफर बच्चे लिए जाते हैं। फिर दो-तीन दिन रखने के बाद स्वस्थ बताकर बच्चा डिस्चार्ज करते हुए आंकड़े भरे जा रहे हैं, जबकि मामूली रिस्क होने पर भी जच्चा-बच्चा ऑन रेकॉर्ड होने की मजबूरी पर उदयपुर रैफर किया जाता है। बुधवार के मामले की तरह कई बार तो बच्चे रैफर भी नहीं किए जा रहे और दम तोडऩे पर सौंपकर दायित्व की इति हो रही है। (Newborn Died In Banswara)

भटकने-भटकाने में यों खुली पोल : - दानपुर क्षेत्र के सरवनी गांव से बुधवार को 7 दिन के नवजात को गंभीर हालत में परिजन बांसवाड़ा लाए। यहां निजी चिकित्सक को दिखाने पर पता चला कि तारा पत्नी गौतम के करीब डेढ़ किलो वजनी बच्चे का गुदा द्वार बंद है और ऑपरेशन होगा। गंभीर मामले पर पहले बच्चा स्टेबल करना जरूरी होने पर एमजी अस्पताल ( Mahatma Gandhi Hospital) भेजा गया, तो वहां पर्ची बनाने के बाद भर्ती को लेकर एसएनसीयू और आउटडोर के बीच बच्चे को धक्के खाने को मिले। इस बीच, स्टाफ और चिकित्सक ने बच्चे को देखकर एसएनसीयू में दाखिल तो किया, लेकिन प्रारंभिक उपचार शुरू करने तक रेकार्ड पर कुछ नहीं लिया गया। तभी बच्चे को उदयपुर ले जाने की चर्चा शुरू हो गई। करीब दो घंटे बीतने के बाद भी बच्चे का टिकट ही नहीं बना और बच्चे की मौत हो गई, तो शव सौंपकर परिजनों को रवाना कर दिया गया।

इनका कहना है... : - मामले में एनएनसीयू प्रभारी डॉ. प्रद्युम्न जैन का कहना है कि बुधवार को लाया गया बच्चा सिरियस था। कोशिश की, लेकिन नवजात नहीं बच पाया। पहले लाया होता तो जान बच जाती। रेकॉर्ड पर जानबूझकर नहीं लेने की बात गलत है। उपचार को प्राथमिकता दी गई, इसलिए वह रेकार्ड पर नहीं आया होगा। मामले को दिखवाएंगे। इधर, पीएमओ डॉ. नंदलाल चरपोटा ने कहा कि अस्पताल में बच्चा आया और ट्रिटमेंट शुरू हुआ है तो रेकार्ड पर होना ही चाहिए। बुधवार के मामले में क्या हुआ, प्रभारी चिकित्सक से बात नहीं हुई है। प्रकरण की जांच की जाएगी।

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