40 स्कूली बच्चे उल्टी-दस्त के शिकार, स्कूल प्रशासन और जलदाय विभाग एक-दूसरे को बता रहे जिम्मेदार

40 स्कूली बच्चे उल्टी-दस्त के शिकार, स्कूल प्रशासन और जलदाय विभाग एक-दूसरे को बता रहे जिम्मेदार

Varun Kumar Bhatt | Updated: 12 Jul 2019, 02:11:51 PM (IST) Banswara, Banswara, Rajasthan, India

कसारवाड़ी स्कूल का मामला, तहसीलदार के निर्देश पर लिया पानी का नूमना

बांसवाड़ा/सज्जनगढ़. कसारवाड़ी विद्यालय में अध्ययनरत 40 बच्चों के बीमार होने के बाद स्कूल प्रबंधन और जलदाय विभाग अधिकारी जिम्मेदारी लेने से कतराते दिखे। विद्यालय प्रबंधन ने पानी का दूषित बताकर जलदाय विभाग पर आरोप मढ़ा, वहीं जलदाय विभाग ने स्कूल में बने मिड-डे-मील पर संदेह जताया। विद्यालय प्रबंधन और जलदाय विभाग अधिकारी घटना की सूचना पर पहुंचे तहसीलदार के समाने ही आरोप लगाने लगे। बाद में तहसीलदार ने पानी के नमूने लेने के निर्देश दिए।

कई घंटों बाद बिगड़ी बच्चों की तबीयत
परिजनों के अनुसार बच्चों ने मंगलवार दोपहर विद्यालय में मिड-डे-मील के तहत भोजन किया था। बुधवार सुबह करीब पांच बजे बच्चों को उल्टी-दस्त व पेट दर्द होने लगा। 10 बच्चों की तकलीफ बढऩे पर परिजन बुधवार दोपहर को कसारवाड़ी चिकित्सालय लेकर पहुंचे। चिकित्सक न मिलने पर वे सीधा डूंगरा छोटा अस्पताल पहुंचे। जहां बच्चों का उपचार किया। देर शाम तक तबीयत में सुधार होने पर घर भेज दिया गया। परिजनों के अनुसार इलाके के 30 अन्य बच्चों को एक-साथ उल्टी दस्त की समस्या हुई। गुरुवार सुबह 30 बच्चों को परिजन कसारवाड़ी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उनका उपचार शुरू हुआ। गुरुवार शाम तक उन्हें छुट्टी दे दी गई। कक्षा 1 से 5 तक के सभी छात्र बीमार उल्टी-दस्त से पीडि़त बच्चे प्राथमिक कक्षाओं के हैं। इनमें सचिन पुत्र निलेश, अकलेश पुत्र नरेश, अमरद पुत्र दिलीप, लक्ष्मी पुत्री प्रवीण, वीरु पुत्र जगदीश, निलेश, श्रवण, धर्मा किरण, आशा, एलीसा, आशिष, मनीष, रेशम, शीतल, रितेश आदि हैं, जिनकी आयु 7 से 12 वर्ष है।

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पानी से बिगड़ी तबीयत
बच्चों का उपचार करने वाले चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने पानी के दूषित होने पर संदेह जताया। उन्होंने बताया कि बच्चों में बीमारी के जिस प्रकार के लक्षण दिख रहे हैं, प्रथम दृष्टया दूषित पानी पीने से बीमार होना स्पष्ट हो रहा है। उन्होंने जांच रिपोर्ट के बाद सही स्थिति सामने आने की बात भी कही।

संस्थाप्रधान का तर्क
दूषित भोजन के आरोप पर प्रधानाचार्य भरत मीणा ने बताया कि मंगलवार को 319 बच्चों ने भोजन किया। भोजन में समस्या होती तो बीमार पड़ते। सिर्फ 40 की ही तबीयत खराब नहीं होती। उन्होंने जलदाय विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया और बताया कि अनास नदी से पानी आता है। पानी को सही तौर पर शुद्ध नहीं किया जाता। दूषित पानी पीने से बच्चों की तबीयत बिगड़ी है। मिड डे मिल प्रभारी राकेश कटारा ने भी दावा किया कि खाने से बच्चों की तबीयत नहीं बिगड़ी।

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सहायक अभियंता बोले
प्रधानाचार्य के आरोप पर जलदाय विभाग के सहायक अभियंता लालजी कटारा ने पानी को शुद्ध बताया और तर्क दिया कि पानी में कोई खराबी होती तो क्षेत्र के सभी लोग बीमार पड़ते। सिर्फ 40 बच्चों को ही तबीयत नहीं बिगड़ती। उन्होंने ने मिड-डे-मील की शुद्धता पर सवाल खड़े किए।

दोनों छुपा रहे गलती
तहसीलदार ने बताया कि स्कूल प्रशासन एवं जलदाय विभाग दोनों ही गलती छिपाने में लगे हैं। चिकित्सक को निर्देश दिए हैं कि छात्रों की ब्लड रिपोर्ट व बीमारी का कारण का पता लगाएं। जलदाय विभाग के अधिकारी को पानी का नमूना लेकर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

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