बांसवाड़ा : गंभीर हालत में रैफर रोगी की एंबुलेंस में मौत, अस्पताल में परिजनों ने किया हंगामा

बांसवाड़ा : गंभीर हालत में रैफर रोगी की एंबुलेंस में मौत, अस्पताल में परिजनों ने किया हंगामा

Chetan Dwivedi | Updated: 12 Nov 2018, 03:23:05 PM (IST) Banswara, Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. शहर के महात्मा गांधी चिकित्सालय से गंभीर हालत पर उदयपुर रैफर किए एक मरीज ने रविवार दोपहर एम्बुलेंस में लिटाते ही दम तोड़ दिया। इस पर परिजनों ने चिकित्सकों और एंबुलेंसकर्मियों पर बगैर ऑक्सीजन रवाना करने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। बाद में इस बारे में पुलिस को रिपोर्ट देकर परिजन बिना पोस्टमार्टम शव ले गए। घाटोल निवासी हीरालाल (54) पुत्र छगनलाल पारसोलिया की तबीयत खराब होने पर परिजन रात को बांसवाड़ा लाए थे। एमजी अस्पताल में भर्ती करने के बाद रात में ही परिजन अपनी रिस्क पर वापस ले गए। सुबह हालत ज्यादा बिगड़ी तो उसे फिर लेकर आए, जहांं सुबह 10.30 बजे हालत नाजुक होने पर हीरालाल को आईसीयू में शिफ्ट करते, इससे पहले परिजन उदयपुर ले जाने की बात करने लगे। इस पर रैफर कर दिया गया।

दोपहर करीब 12.30 बजे 108 एंबुलेंस उपलब्ध होने पर उसे वार्ड से नीचे लाया गया, जहां एंबुलेंस तक लाते ही प्रौढ़ निढाल हो गया। एक परिजन ने तत्काल ड्यूटी डॉक्टर को बुलाया, तो जांच कर उन्होंने मृत घोषित कर दिया। यह जानकारी मिलते ही परिजन उखड़ गए और लापरवाही कर साथ में ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं करने और एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं होने के आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। मामले पर जैसे-तैसे चौकी पुलिस ने समझाइश की। बाद में इस बारे में मृतक के परिजन हंसमुख पुत्र वरदीचंद दोसी ने रिपोर्ट दी और सभी शव लेकर चले गए। इस बारे में जांच अधिकारी अस्पताल के चौकी प्रभारी महेंद्रपालसिंह ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में परिजनों ने भी माना कि मरीज गंभीर रूप से बीमार था। 108 के चालक ने अपने बयान में परिजनों के आरोप गलत बताए हैं। उसने एंबुलेंस में ऑक्सीजन उपलब्ध होने की बात कही और कहा कि मरीज के पहुंचते-पहुंचते मृत्यु हो गई।

इनका कहना है...
मरीज को रात को परिजन लाए। हालत खराब होने पर भर्ती किया, लेकिन परिजन उसे वापस ले गए और सुबह लकवे जैसी दशा में फिर लाए। फिर आईसीयू में शिफ्ट कर ही रहे थे कि परिजन उदयपुर ले जाने को कहने लगे। रैफर करने के डेढ़ घंटे बाद मरीज को वार्ड से ले जाया गया और रवानगी के समय ही निधन हो गया। इसमें अस्पताल की ओर से किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है।
डॉ. देवेश गुप्ता, सीनियर फिजिशियन, महात्मा गांधी चिकित्सालय

रैफर केस में मरीज वेंटिलेटर पर था, लेकिन बगैर ऑक्सीजन रिश्तेदार वार्ड से ले आए और एंबुलेंस में लाते ही मौत हो गई। ड्यूटी डॉक्टर ने खुद जांच की थी। एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था थी, लेकिन रोगी ने पहले ही दम तोड़ दिया था। बाद में लोगों ने गुस्सा एंबुलेंस पर उतारा।
सुनीलकुमार, 108 एंबुलेंस प्रभारी

मरीज को ऑक्सीजन लगाकर सिलेंडर के साथ वार्ड से भेजना था। एंबुलेंस में भी ऑक्सीजन नहीं दी। अगर ऑक्सीजन लगी रहती, तो मरीज की जान बच सकती थी। इसमें डॉक्टरों और एंबुलेंसकर्मियों की लापरवाही पर हमने पुलिस कार्रवाई के लिए रिपोर्ट दी है।
हंसमुख वरदीचंद दोसी, मृतक के रिश्तेदार और शिकायतकर्ता

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned