रक्षाबंधन पर वैदिक मंत्रों के साथ हुए श्रावणी उपाकर्म, पूजा-अर्चना के बाद विप्रवरों ने धारण किए यज्ञोपवीत

Varun Kumar Bhatt

Updated: 16 Aug 2019, 12:36:13 PM (IST)

Banswara, Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. जिलेभर में श्रावण माह के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का दौर जारी है। मठ-मंदिरों में भगवान की पूजा अर्चना के साथ विशेष आराधना की जा रही है। गुरुवार को गढ़ी उपखंड क्षेत्र के बोरी गांव स्थित भैरव मंदिर के सत्संग भवन में रक्षाबंधन के अवसर पर श्रावणी उपाक्रम किए गए। विप्रवरों की ओर से धार्मिक अनुष्ठानों के साथ यज्ञोपवीत धारण किए गए। इस दौरान बड़ी संख्या में विप्रवरों ने वैदिक ऋचाओं का पाठ किया। इससे पूर्व मंत्रोच्चार के साथ हिमाद्री स्नान भी किया गया।

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पं. कीर्तिश भट्ट ने बताया कि श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर ब्राह्मण समाजजन एकत्रित होते है और विशेष पूजा अर्चना कर नया यज्ञोपवीत धारण करते है। यह प्रत्येक वर्ष ब्राह्मणों की ओर से किया जाने वाला आवश्यक नित्य कर्म है। भट्ट ने बताया कि यज्ञोपवीत की महत्ता सनातन धर्म के ग्रंथों और वेदों में भी बताई गई है। श्रावणी कर्म में विधि विधान से तर्पण के माध्यम से यज्ञोपवीत को पवित्र कर धारण किया जाता है। श्रावणी उपाक्रम के दौरान विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना की जाती है।

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