बांसवाड़ा : अनास बांध बनाने को लेकर सरकार की नीयत से उठा पर्दा, राजनीतिक लाभ लेने के लिए की थी लुभावनी घोषणा

विरोध पर घोषणा वापस, अब पर्दा उठा कि प्रस्ताव ही केन्द्र को नहीं भेजा, जिले में अनास बांध निर्माण की बजट घोषणा का हश्र

By: Ashish vajpayee

Updated: 13 Mar 2018, 11:51 PM IST

सुभाष मेहता. बांसवाड़ा. जिले में जिस अनास बांध निर्माण की बजट घोषणा को लेकर पिछले दिनों बवाल हुआ था और इसके दबाव में सरकार को बांध नहीं बनाने की घोषणा करनी पड़ी थी, उसे लेकर एक हकीकत से पर्दा उठा है और वह यह कि राज्य सरकार ने इस बांध के प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत प्रस्ताव ही केन्द्र को नहीं भिजवाए थे। इस चुनावी वर्ष में राज्य सरकार ने अपने आखिरी बजट में कई लुभावनी घोषणाएं की हैं। इनमें से कई का धरातल ही नहीं है। इन्ही में से एक घोषणा अनास बांध की थी।

दिखावे के तौर पर राज्य सरकार ने एक हजार करोड़ की लागत से अनास बांध बनाने की घोषणा कर दी, लेकिन इसे लेकर अव्वल तो कांग्रेस के विरोध करने के बाद चुनावी लाभ का पासा पलट गया और सरकार को लेने के देने पड़ गए। तब उसनेे योजना से हाथ पीछे खींच लिए, लेकिन योजना की असली सच्चाई जो सामने आई है उससे सरकार की नीयत भी संदेह के घेरे में आ गई। सरकार ने जिले से गए इस बांध के प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजे ही नहींं। जब प्रस्ताव भेजे ही नहीं तो मंजूर होने का भी सवाल नहीं था।

आरटीआई में हुआ खुलासा
जल संसाधन विभाग की ओर से जिले में सिंचित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार से बजट प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना के तहत करीब 5 हजार 524 करोड़ के प्रस्ताव बनाकर भिजवाए गए। इसमें एक हजार करोड़ से प्रस्तावित अनास बांध को भी शामिल किया गया था।

इस बारे में जब आवेदक गोपीराम अग्रवाल ने सूचना प्राप्त करने के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो जल संसाधन विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई की यह प्रस्ताव भारत सरकार को भिजवाए ही नहीं गए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि परियोजना के 50 प्रतिशत तक पूर्ण होने पर प्रस्ताव सरकार को भिजवाया जा सकते हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब योजना के तहत केन्द्र सरकार से बजट ही प्राप्त नहीं हो सकता था तो राज्य सरकार की ओर से बजट में अनास बांध बनाने की घोषणा किस आधार पर कर दी गई।

दो लाख हैक्टेयर जमीन को सिंचित करने के प्रस्ताव
प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना के तहत जिले में एक लाख 89 हजार 327 हैक्टेयर को सिंचित करने के लिए 494 प्रस्ताव राज्य सरकार के माध्यम से केन्द्र सरकार को भिजवाया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में जबकि राज्य सरकार ने यह मान लिया है कि उन्होंने जिला स्तर से प्राप्त प्रस्तावों को केन्द्र सरकार के पास भेजे ही नहीं है तो किस तरह इन योजनाओं को पूरा किया जा सकेगा।

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