Video : बांसवाड़ा : जहरीले जानवर ने काटा तो 30 दिनों तक लगाता रहा भोपों के चक्कर, अब घुटनों तक सड़ा पैर काटने की नौबत

झाडफ़ूंक के चक्कर में नहीं कराया उपचार, गल गया घुटनों तक पैर

By: Ashish vajpayee

Published: 09 Feb 2018, 12:09 PM IST

आशीष बाजपेई. बांसवाड़ा. अंधविश्वास, झाड़ फूंक और टोने-टोटकों के चक्कर में फंसकर जहरीले जीव के काटने से पीडि़त एक युवक पर दाहिना पैर गंवाने का खतरा पैदा हो गया है। डूंगरपुर जिले की साबला तहसील के हमीरपुरा गांव का यह युवक उपचार के लिए तीस दिन तक भोपों के चक्कर लगाता रहा और उपचार न मिलने से उसका पैर संक्रमण से सड़ गया। अब हालत गंभीर होने पर वह अस्पताल की शरण में पहुंचा है लेकिन इसमें भी अंधविश्वास यह कि माता रानी का आदेश मिला तो वह अस्पताल गया। हमीपुरा गांव के 35 वर्षीय हुरजी पुत्र गंगाराम के मुताबिक उसे सांप ने काटा है, लेकिन डाक्टरों का मानना है कि सांप ने काटा होता तो उसके जहर से इतने दिन बच पाना संभव नहीं था। किसी और जहरीले जानवर ने काटा हो सकता है।

कहा जाओ अस्पताल

पीडि़त हुरजी ने बताया कि वह खेती करता है। 30 दिन पहले शाम को घर लौट रहा था। रास्ते में सांप ने उसे डस लिया। वह भोपा के पास पहुंचा और उपचार कराया, पर फायदा नहीं मिला। फिर दो दूसरे भोपों के पास पहुंचा तब भी कोई लाभ नहीं हुआ। इस बीच पैर का मर्ज बढ़ता गया। उसने बताया कि दो दिन पहले माता (किसी पर आई देवी मां की छाया) ने कहा कि हुरजी को अस्पताल ले जाओ तो उसे महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे।

जब डगर-डगर सांपों का कहर तो फिर क्यों भोपों की शरण

बांसवाड़ा. बांसवाड़ा-डूंगरपुर में सांपों की भरमार है। कई प्रजाति के सांप ऐसे हैं, जिनके काटने से चंद मिनटों में ही मौत होना तय हैं। कुछ ऐसे हैं, जिनके काटने में इंसान धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ता है और मौत तक पहुंचते-पहुंचते उसका पूरा शरीर सड़ जाता है। बांसवाड़ा-डूंगरपुर में एक वर्ष में 128 लोगों को सांपों ने शिकार बनाया, जिनमें से18 लोगों की मौत हो गई। लोग सांपों के काटने पर भोपों का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनके जीवन पर संकट मंडराता है।

जहरीली नहीं होती गोयरी

वन्य विभाग से के अनुसार बांसवाड़ा-डूंगरपुर में पाया जाने वाला गोयरी नामक जानवार बिल्कुल भी जहरीला नहीं होता है। यह महज लोगों की भ्रांति है कि उसमें जहर होता है। हां कभी-कभी यह जरूर होता है कि गोयरी ने कोई जहरीला जानवर खाया हो और उसका जहरीला अंश गोयरी के दांतों में फंसा रहा गया हो। जिसके बाद उसने इंसान को काटा हो और जहर की कुछ मात्रा इंसान के शरीर में चली गई हो। ऐसी स्थिति में इंसान की मौत कम ही होती है।

अंधविश्वास खतरनाक

आज के वैज्ञनिक युग में अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए। यह जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है।भोपों के पास जाने की बजाय चिकित्सक से परामर्श करें और व्यवस्थित उपचार कराएं। दुनिया तेजी से बदल रही है। शिक्षा के साथ मानसिकता में बदलाव बेहद जरूरी है।
अच्युतानंद महाराज, बेणेश्वर धाम

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