देखिए...Video : बजरंग बली के आसरे सरस्वती का मंदिर, भीतर से पूजा-पाठ के स्वर, बाहर आखर ज्ञान की गूंज

By: deendayal sharma

Published: 04 Apr 2019, 09:01 AM IST

Banswara, Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा...। हनुमान चालीसा की यह पंक्ति जिले के नादिया पंचायत क्षेत्र के बजरंग बली का मंदिर चरितार्थ कर रहा है। इससे करीब छह साल से बच्चों को पढऩे-पढ़ाने के लिए छत का संकट दूर हो रहा है। जी हां, आज के डिजिटल युग में भी इस आदिवासी बहुल इलाके में उपेक्षा के चलते राजकीय प्राथमिक विद्यालय छापरियापाड़ा को स्थायी भवन नसीब नहीं हो रहा है, जिसके चलते शिक्षा विभाग को बजरंग बली मंदिर का आसरा है। यहां भीतर पूजा-पाठ के स्वर गूंजते हैं, तो बाहर आखर ज्ञान की गूंज लंबे समय से है। मंदिर के बरामदे में पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को दो भागों में बिठाकर यहां दो शिक्षक प्रतिदिन अध्यापन कराते हैं। मंदिर में शिक्षा बेहतर विकल्प है, लेकिन सवाल सरकार और प्रशासन में बैठे लोगों की काबिलियत का है जो स्कूल को अपना भवन तक उपलब्ध नहीं करा पाए हैं।

2013 से मंदिर में...
शिक्षिका दीपिका व्यास बताती हैं कि विद्यालय भवन का अभाव है, ऐसे में मंदिर में स्कूल चल रहा है। दो वर्ष पूर्व किसी भामाशाह की ओर से भवन दिया था। उसमें कुछ दिन स्कूल संचालन किया। फिर वापस इसे हनुमान मंदिर में संचालित करना पड़ा। स्कूल के लिए भूमि आवंटन हो चुका है, आगे की प्रक्रिया चल रही है। जल्द व्यवस्था होती है तो सुविधा होगी। पुजारी देवीलाल महाराज ने बताया कि 2013 से स्कूल मंदिर में चल रहा है।

फैक्ट फाइल

- राजकीय प्राथमिक विद्यालय छापरियापाड़ा
- पहली से पांचवीं तक की कक्षा, 51 विद्यार्थियों का नामांकन
- आंगनवाड़ी में पकता है पोषाहार, पानी के लिए भी होती है दौड़भाग
- 2013 से मंदिर में संचालित हो रही स्कूल, बीच में दो वर्ष एक भवन में किया था शिफ्ट
-दो-दो कक्षाएं एक साथ बिठाकर अध्यापन की मजबूरी

इनका कहना है
स्कूल मंदिर में 6 वर्षों से संचालित हो रहा है। स्कूल के लिए जमीन का आवंटन हो चुका है। साथ ही आगे की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। भवन बनने पर शिफ्ट कर दिया जाएगा।

अनीश कुमान, पीओ राउमावि नादिया

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