बांसवाड़ा : संघर्ष के बीच गुजर-बसर, फिर कैसे होंगे इन टापरों में शिक्षा के ‘दर्शन’, देखें वीडियो...

Digital Education, Education By TV And Radio : पत्रिका पड़ताल- कई गांवों में अब भी विद्यार्थी-अभिभावक नई व्यवस्था से अनजान

By: Varun Bhatt

Published: 02 Jun 2020, 04:56 PM IST


वरुण भट्ट/बांसवाड़ा. कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान में विद्यार्थियों की शैक्षिक गाड़ी पटरी से न उतरे इसके लिए की जा रही टेलीविजन, रेडियो एवं ऑन लाइन शिक्षण की कवायद से एक ओर जहां प्रदेश के लाखों विद्यार्थी लाभांवित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अब भी जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा के हजारों विद्यार्थी इससे दूर हैं। दो वक्त की रोटी के जुगाड़ के लिए सघर्षरत सैंकड़ों परिवार आज भी ऐसे हैं, जहां पर मूलभूत सुविधाएं नही हैं। ऐसे में शिक्षा की यह नई व्यवस्था उनके लिए सपना बनकर रह गई हैं। सोमवार को शिक्षा दर्शन कार्यक्रम की शुरूआत के साथ ही पत्रिका ने जनजाति क्षेत्र की पड़ताल की तो टापरों में गुजर-बसर जिन्दगी के बीच शिक्षा के दर्शन नहीं हो पाए।

नहीं है जानकारी
गांव के मुख्य मार्ग पर पेड़ की छांव में तीन विद्यार्थी बैठे हुए थे। नवमीं के हरिराम, दसवीं के नीतेश एवं पांचवीं के राहुल ने शैक्षिक नवाचार को लेकर अनभिज्ञता जताई। घर में टेलीविजन की सुविधा भी नहीं होना बताया। खेरडाबरा गांव के अभिभावक प्रभुलाल ने बताया कि बेटी सुनिता 11वीं एवं सीमा दसवीं में अध्ययररत है, लेकिन नई तकनीक से शिक्षा से जुड़े संसाधन नही है।

टीवी-मोबाइल नहीं
चीब गांव में मुख्य मार्ग पर दो बेटियों के साथ सब्जी बेचते अभिभावक विश्राम ने बताया कि हमारे पास मोबाइल व टीवी की सुविधा नही है। दोनों बेटियों ने बताया कि पढ़ाई तो करनी हैं, लेकिन जब से स्कूल बंद है, तब से पढ़ाई भी बंद है। अब स्कूल शुरू होने का इंतजार है। इसी गांव में एक टापरे में बैठे पांच से 6 अभिभावकों की टोली का भी यही कहना था कि हम रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में जुटे हुए है। बच्चों की शिक्षा भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके लिए तकनीकी संसाधन भी जरूरी हैं। चीब के विनोद माहीडेम बोरखेड़ा स्कूल में अध्ययनरत है। वे बताते है कि नई शिक्षण व्यवस्था की उसे जानकारी ही नही है।

ये 4 बड़ी समस्याएं -
- कई घरों तक बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव।
- मोबाइल एवं तकनीकी रूप से दक्षता का अभाव। एंराइड फोन नही होने से यू ट्यूब जैसी जानकारी से भी वे दूर है- टेलीविजन भी कई घरों में नही है।
- कई गांवों में इंटरनेट की कनेक्टिविटी भी नही हैं।

इनका कहना है
सरकार स्तर से शिक्षण से जोडऩे के लिए विभिन्न प्रयास व नवाचार किए जा रहे है। विद्यार्थियों को रेडियो, टीवी, इंटरनेट में जो भी सुविधाजनक हो उससे जोडकऱ शिक्षण कराना है। स्थानीय स्तर पर इंटरनेटर सहित अन्य सुविधाओं की कुछ जगह समस्या जरूर है। पूरे जिले की एक-दो दिन में समीक्षा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली जाएगी।
जयदीप पुरोहित, एपीसी व जिला प्रभारी बांसवाड़ा

फैक्ट फाइल
जिला बांसवाड़ा
कुल ब्लॉक- 11
पंचायत पीईईओ- 346
पीईईओ के तहत विद्यालय- 2642
कुल विद्यार्थियों की संख्या - 378100
स्माइल से नहीं जुड़ पाए थे- 145699 विद्यार्थी

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