बांसवाड़ा : सात दशक में भी बिजली नहीं आई, इंतजार करते पीढ़ी बुढ़ाई, चिमनी में कर रहे बच्चे पढ़ाई

बांसवाड़ा : सात दशक में भी बिजली नहीं आई, इंतजार करते पीढ़ी बुढ़ाई, चिमनी में कर रहे बच्चे पढ़ाई

deendayal sharma | Publish: Apr, 22 2019 03:42:16 PM (IST) | Updated: Apr, 22 2019 03:42:17 PM (IST) Banswara, Banswara, Rajasthan, India

चिडिय़ावासा. बांसवाड़ा शहर से मात्र तीन किलोमीटर दूर भापोर पंचायत के छत्रसालपुर गांव की बीस घरों की आबादी आजादी के 72 वर्ष बाद भी बिजली की रोशनी को तरस गई है। जबकि इस बस्ती से भापोर जीएसएस मात्र एक किलोमीटर दूर है। एक पीढ़ी घरों में बिजली की सुविधा का सपना देखते-देखते बुढ़ा गई व नई पीढ़ी भी ढिबरी की रोशनी में जीवन गुजारने को मजबूर है। इधर प्रशासन व विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों को करीब ढाई सौ लोग की बस्ती की समस्या से कोई सरोकार नहीं है। बस्ती के वार्ड पंच वालेंग पाटीदार ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मंत्रियों, प्रशासन और विद्युत वितरण निगम के आला अधिकारियों को ज्ञापन देते आए हैं।

फिर भी किसी ने समस्या हल करने की जहमत नहीं उठाई। सरपंच मोनिका दायमा, को भी समस्या से अवगत कराया। हर बार कोरा आश्वासन ही मिला। बस्तीवासियों ने बताया कि गांव में दस वर्ष पूर्व बिजली के पोल भी पहुंचे और इन्हें लगाने के लिए गड्ढे भी खोद दिए। इसके बाद कोई सुध नहीं ली। एक पीढ़ी की उम्र ढिबरी की रोशनी में बीत गई। बिजली की उम्मीद लगाए बैठे बुजुर्गों का कहना है कि हमारी जिंदगी तो अंधेरे में निकल गई लेकिन बच्चों की जिंदगी कैसे निकलेगी। गांव के कई बच्चे बिजली के अभाव में शहर में किराए का मकान लेकर पढ़ते हैं। चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि आश्वासन तो खूब देते हैं। लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं होता।

घरों में टिमटिमाती चिमनी
समस्या सुनाते महिलाएं के आंखों से आंसू छलक पड़े। बस्ती की महिलाओं ने बताया कि चिमनी की रोशनी में खाना बनाना पड़ा है। बच्चों का भविष्य भी अंधकार में है। इधर करोसिन भी पूरा नहीं मिलता। बिजली के अभाव में पेयजल किल्लत बनी रहती है। गांव में एक भी सरकारी ट्यूबवैल नहीं है।

सुविधाओं से वंचित
लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां करीब पौने दो सो मतदाता है। वार्ड पंच वालेंग पाटीदार, लालू, लक्ष्मण, ईश्वर, लाला, नारायण, गटू, धनजी, ज्योति, मोती, संतु, सुनीता, कमला, आशा, मीरा आदि ने निगम व प्रशासन के खिलाफ नारोबाजी कर रोष जताया।

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