बांसवाड़ा : ‘माही सागर’ की धवल छटा पर मायूसी की चादर, दिन निकलने के साथ ही धूमिल हो रही गेट खुलने की आस

बांसवाड़ा : ‘माही सागर’ की धवल छटा पर मायूसी की चादर, दिन निकलने के साथ ही धूमिल हो रही गेट खुलने की आस

Ashish Bajpai | Publish: Sep, 08 2018 12:34:35 PM (IST) Banswara, Rajasthan, India

बांसवाड़ा. प्रदेश के दक्षिणांचल में अवस्थित बांसवाड़ा की जीवनरेखा कहे जाने वाला माही बांध इस वर्ष मध्यम बारिश के चलते अपनी भराव क्षमता तक नहीं पहुंचा है और मानसून के उत्तरार्ध की दस्तक के बाद भी अब तक छलक नहीं पाया है। माही बांध अब भी करीब तीन मीटर खाली है और वर्तमान में रुक-रुककर चल रहे बारिश के दौर से ये आशंका उठ खड़ी हुई हैे कि इस बार वागड़वासियों को माही बांध के गेट से ऊफनती जलराशि का मनोरम नजारा देखने को शायद नहीं मिले हालांकि पिछले अनुभव जरूर ऐसे हैं कि सितम्बर में भी बांध के गेट खुले।

बांसवाड़ा में प्रतिवर्ष मानसून में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू होने के साथ ही जिलेवासियों में बांध के भरने और इसके छलकने की आस बंध जाती है। हालांकि बांध में पानी की आवक मध्यप्रदेश के धार और आसपास के क्षेत्र में होने वाली बारिश पर निर्भर है, लेकिन इस बार आवक क्षेत्रों में भी मूसलाधार बारिश का दौर लगातार नहीं बना है। इसके चलते बांध में पानी की आवक धीरे-धीरे हो रही है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार शुक्रवार शाम छह बजे तक माही बांध का जलस्तर अपनी भराव क्षमता 281.50 मीटर के मुकाबले 278.40 मीटर था।

अगस्त में सर्वाधिक खुले गेट
अमूमन बांसवाड़ा में जून के तीसरे सप्ताह में बारिश दस्तक दे देती है और मध्य प्रदेश में भी बारिश का क्रम बना रहने पर माही बांध के गेट जल्द खुलने के आसार रहते हैं। बीते वर्षों में देखें तो सामान्यतया बांध के गेट अगस्त में ही सर्वाधिक खुले हैं। वर्ष 1990 में चार अगस्त, 1991 में एक अगस्त, 1993 में नौ अगस्त, 1994 में दो अगस्त, 96 में सात अगस्त, 97 में आठ अगस्त, 98 में 28 अगस्त, 2004 में 15 अगस्त, 2012 में 19 अगस्त, 2016 में नौ अगस्त और 2017 में 28 अगस्त को गेट खुले थे।

नहीं करना पड़ा था अधिक इंतजार
वर्ष 2015 में जिलेवासियों को माही के गेट खुलने का अधिक इंतजार नहीं करना पड़ा। उस वर्ष जल आवक क्षेत्रों और बांसवाड़ा जिले में भारी बरसात का दौर चलने से 27 जुलाई को ही माही बांध के गेट खोल दिए गए थे। माही बांध में एक ही रात में साढ़े 26 फीट पानी की आवक हुई थी। उदयपुर के भूगोलवेत्ता डा नरपत सिंह राठौड़ के अनुसार मध्य प्रदेश में सक्रिय अवदाब के कारण बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौडगढ़़ और हाड़ौती में अगले दो दिन वर्षा होने की उम्मीद है। पश्चिमी मध्यप्रदेश को छोडकऱ शेष हिस्से में अच्छे बादल हैं। गौरतलब है कि माही बांध में पानी की आवक मध्य प्रदेश् के पश्चिमी हिस्से की वर्षा पर निर्भर है।

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