नवजातों की मौत रोकने के लिए ऐसा किट तैयार कर रहा राजस्थान का यह युवा डॉक्टर, जो बताएगा कि डिलीवरी वक्त पर होगी या प्री-मेच्योर

Newborn Deaths In Rajasthan, Children Died In Hospital : वागड़ के डॉ. सर्वेश की कंपनी तैयार कर रही टेस्ट किट कोंपल, रक्त की दो बंूद से पता चल जाएगा

By: deendayal sharma

Published: 06 Jan 2020, 01:53 PM IST

बांसवाड़ा. प्रदेश में प्री-मेच्योर बच्चों की मौतों का सिलसिला रोकने के लिए बांसवाड़ा के युवा इंटरप्रेन्योर डॉ. सर्वेश मालवीय जैन एक ऐसा किट बाजार में लाने के प्रयासरत है, जिसमें गर्भवती की दो बूंद खून डालते ही पता चल जाता है कि डिलीवरी टाइम पर होगी या प्री-मेच्योर। इससे समय रहते आसानी से वस्तुस्थिति स्पष्ट होने पर बच्चों को बचाना मुमकिन होगा। वर्तमान में पंजाब में अपनी कंपनी ओनिओसोम हैल्थकेयर की रिसर्च और टेक्नोलॉजी विंग के साथ बतौर निदेशक जुटे खांदू कॉलोनी निवासी डॉ. मालवीया हालांकि इसके लिए वित्त प्रबंध नहीं कर पाने से उलझे हुए हैं। वे बताते हैं कि सीएसआईआर- इंस्टीट्यूट फॉर माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (इमटेक) के वैज्ञानिकों द्वारा बनाए टेस्टिंग किट कोंपल के 284 महिलाओं पर किए क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे हैं। इसके कुछ टेस्ट पीजीआई एमईआर में भी हुए हैं। लगभग 84 फीसदी रिजल्ट सही पाए गए हैं। जो 16 परसेंट रिजल्ट सही नहीं आए, उनमें भी डिलिवरी टाइम में अधिकतम 11 दिन का अंतर ही पाया गया है। अब वे इसे कमर्शिलाइजेशन करने के प्रयास में है, लेकिन वित्तीय संकट है। सरकार से मदद मिलती है तो सफलता पर चिकित्सकों को भी मासूमों को बचाने में मदद मिलेगी।

यों सूझा आइडिया : - बांसवाड़ा में सर्राफा कारोबारी सुरेश मालवीय जैन के बेटे डॉ. मालवीया के अनुसार अब तक प्री-मैच्योर बर्थ को चेक करने का सिस्टम यूटरस से एमनियोटिक वॉटर का सैंपल लेकर टेस्ट का है। इसके लिए हॉस्पिटल जाना होता है, वहीं स्पेक्लम डालने से यूटरस में इंफेक्शन का डर रहता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशीष गांगुली की टीम की नई खोज से फिंगर टिप से लिया खून ही सही रिजल्ट दे देता है। असल में गांगुली एक ऐसे प्रोटीन पर काम कर रहे थे, जो इंजरी दुरुस्त करता है। चूंकि सबसे ज्यादा इंजरी बच्चे को जन्म देने में होती है। यहीं से उन्हें ख्याल आया और उन्होंने इस दिशा में काम करना शुरू किया। फिर 2013 में गेट्स फाउंडेशन से ग्रांट मिली। सीएसआईआर ने भी इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद दी। अब डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी ने इस किट को बाजार में लाने के लिए मंजूरी दी है। इसमें 50 फीसदी हिस्सा ओनिओसोम खर्च कर रहा है।

इस तरह चलता है पता, मदद मिले तो आसान हो... किट से मां के खून में जेलसोलिन की मात्रा को मापते हैं। प्रोटीन की मात्रा शरीर में बढ़ती है तो बच्चा समय पर पैदा होगा। यदि यह कम रहती है तो प्री-मैच्योर डिलीवरी होती है। कोंपल किट 5वें महीने में सबसे बेहतर रिजल्ट देती है। यह टेस्ट घर भी किया जा सकता है। इसका फायदा यह होगा कि प्री-मैच्योर डिलिवरी का पता चलने पर ट्रीटमेंट वक्त पर शुरू हो जाएगा। डॉ. सर्वेश के अनुसार उनका किट करीब छह 600 रुपए में उपलब्ध होने की संभावना है। इसके केंद्र सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग से 5 करोड़ रुपए मंजूर भी हुए हैं, लेकिन अब तक वित्तीय मदद नहीं मिली है। यदि राज्य सरकार से मदद मिल जाए, तो वे जल्द ही किट उपलब्ध कराया जा सकता है।

Show More
deendayal sharma Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned