बाराबंकी में जान का दुश्मन बना तेंदुआ, डीएफओ ने कहा- मेरा काम भीड़ को कंट्रोल करना

रामनगर के महादेवा चौकी इलाके में उस समय दहशत का माहौल बन गया जब इलाके के एक बाग में तेंदुए को ग्रामीणों द्वारा देखा गया।

बाराबंकी. रामनगर के महादेवा चौकी इलाके में उस समय दहशत का माहौल बन गया जब इलाके के एक बाग में तेंदुए को ग्रामीणों द्वारा देखा गया। सूचना पाकर पीआरवी डायल 100 के सिपाही के सिपाही इंद्र बहादुर सरोज मौके पर पहुंचे और तेंदुए की तलाश करने लगे। तभी अचानक छिपे हुए तेंदुए ने उन पर पंजे से वार करके उन्हें घायल कर दिया। सिपाही को तत्काल जिला अस्पताल लाया गया। जहां से उसे लखनऊ ट्रामा रेफर कर दिया गया।


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दो घंटे बाद पहुंची वन विभाग की टीम

लेकिन सारा मामला यहीं पर खत्म नहीं होता। घटना के बाद घबराए ग्रामीणों ने पुलिस के साथ-साथ डीएफओ जावेद अख्तर और वन विभाग की टीम को घटना की सूचना दी। पुलिस के आलाधिकारी तो तत्काल मौके पर पहुंच गए। लेकिन तेंदुए को पकड़ने के लिए योजना बनाने के लिए जिम्मेदार वन विभाग के डीएफओ और अन्य वन कर्मी लगभग दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे।




डीएफओ का अजीब बयान

हद तो तब हो गई जब घटना के 7 घंटे बीतने के बाद भी लखनऊ से तेंदुए को पकड़ने वाली विशेषज्ञ की वह टीम नहीं आई। जिसके 1 घंटे के भीतर पहुंचने का दावा कर ग्रामीणों और मीडिया को डीएफओ साहब लॉलीपाप दे रहे थे। जब भीषण गर्मी से हलकान होकर मीडिया ने डीएफओ साहब से यह पूछा कि अब कई घंटे हो रहे हैं। आपने तेंदुए को पकड़ने की क्या योजना बनाई है। तो डीएफओ साहब का गैरजिम्मेदाराना बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि मेरा काम पब्लिक/भीड़ को कंट्रोल करना है और वही मैं कर रहा हूं। तो साहब वन विभाग में जिले के इन सबसे बड़े डीएफओ साहब से कोई यह पूछे कि अगर आपका काम सिर्फ पब्लिक और भीड़ को ही कंट्रोल करना है। तो जंगल में घुसे इस तेंदुए को क्या पुलिस और तहसील प्रशासन के लोग पकड़ेंगे।


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नितिन श्रीवास्तव
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