बाराबंकी में नकली उर्वरक तैयार करने वाली फैक्ट्री सीज, मौके से आरोपी हुए फरार

मौके पर पहुंचे उप कृषि निदेशक द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराते हुए फैक्ट्री को सील करवा दिया गया है।

बाराबंकी. यूपी के बाराबंकी जिले में स्थानीय लोगों द्वारा नकली खाद बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गयी है। जिसकी सूचना मिलते ही मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचते ही नकली खाद तैयार करने का काला कारोबार करने वाले आरोपी मौके से भागने में कामयाब रहे। लेकिन जिला मुख्यालय और कृषि विभाग के नजदीक बड़े पैमाने पर तैयार की जा रही नकली खाद, कृषि विभाग के अधिकारियों पर कई सवाल जरूर खड़े कर रहा है। फिलहाल मौके पर पहुंचे उप कृषि निदेशक द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराते हुए फैक्ट्री को सील करवा दिया गया है।

 

स्थानीय लोगों ने पकड़ी फैक्ट्री

बाराबंकी जिला मुख्यालय से रामनगर व फैजाबाद को जाने वाले बाई पास चौराहे के निकट स्थानीय लोगों द्वारा नकली खाद बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गयी है। जिस फैक्ट्री को पकड़वाने में स्थानीय व्यक्ति जंग बहादुर पटेल और उनके सहयोगी ब्रजेश सोनी की सबसे अहम भूमिका रही। नकली खाद बनाने का ये काला कारोबार पिछले काफी समय से जिले में फल फूल रहा है। जिसमें कृषि विभाग के अधिकारियों की भी मिली भगत बताई जा रही है। फैक्ट्री का भांड़ाफोड़ कराने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जंग बहादुर पटेल का कहना है पूरे जिले में नकली खाद बनाने का काला कारोबार अभी भी फल फूल रहा है जिसकी बानगी पकड़ी गयी खाद तैयार करने की ये फर्जी फैक्ट्री है जो उप कृषि निदेशक कार्यालय से महज चंद कदम दूर किसानों की खेती और उनकी फसल बर्बादी का खेल चल रहा था जो किसानों को जीते जी उनकी मेहनत पर पानी फेरने का काम किया जा रहा था।

 

आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू

उधर मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी नवाबगंज सहित कोतवाली पुलिस ने फैक्ट्री चलाने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। उप कृषि निदेशक बाराबंकी अनिल कुमार सागर का कहना है मुखबिर की सूचना पर क्षेत्र में बेची जा रही नकली खाद पकड़ने के बाद शहर में चल रही फैक्ट्री पकड़ी गयी है। उन्होंने फैक्ट्री में निरीक्षण के दौरान जानकारी दी है कि फैक्ट्री में नकली खाद बनाने का सामान मिला है, जो किसानों की खेती के लिए जहर से कम नही है। उन्होंने बताया कि हरख ब्लाक के नेवली में जब ये नकली खाद दुकानदार को बेची जा रही थी उसी दौरान मुखबिर की सूचना पर मौके पर भूमि संरक्षण अधिकारी पहुंचे और उसके बाद इस फैक्ट्री का भांडाफोड़ हुआ। फैक्ट्री से आईपीएल की एमओपी 229 बोरी, एनपी के नाम से कृषि गोल्ड ब्रांड का प्रतिबंधित सामान के साथ-साथ दानेदार धनुष ब्रांड का जिप्सन की दो बोरियों के आलावा बावर्ची नमक की 120 बोरियां भी फैक्ट्री से बरामद की गयी हैं। जो खेती के लिए जहर से कम नहीं हैं। इस फैक्ट्री के काले कारोबार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मोर छाप फेरसेल्फिट के 27 पैकेट 10 किलोग्राम वजन की भी हैं। उर्वरक बनाने में श्री सीमेंट नाम की 92 बोरी, गेरू और 630 बोरी नमक की बोरियां भी अधिकारियों को बरामद हुई हैं।

 

मौके से सभी आरोपी फरार

फैक्ट्री में छापा पड़ने के बाद मौके से सभी आरोपी भाग निकले हैं। जिनमें से श्रवण कुमार नाम के एक व्यक्ति का मौके पर आधार कार्ड और कुछ जरूरी कागजात मिले हैं। जिनके आधार पर उप कृषि निदेशक के द्वारा आरोपियों के खिलाफ धारा 3/7 अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गयी है और फरार चल रहे आरोपियों को जेल भेजने की बात कह रहे हैं। एक तरफ सरकार किसानों की तरक्की और उनकी फसलों के लिए विभागीय अनुदान देकर लगातार घाटे में जा रही कृषि को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाने का दावा करती है। वहीं कृषि विभाग के नाक के नीचे किसानों की फसलों और उनके खेतों के लिए तैयार किया जा रहा जहर कृषि विभाग के अधिकारीयों की कार्यशैली और छापेमारी पर कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखने वाली बात तो यही होगी कितनी नकली फैक्ट्रियां अब विभाग छापेमारी कर पकड़ता है।

नितिन श्रीवास्तव
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