बाढ़ पीड़ितों के जख्मों पर अब सरकारी कर्मचारी रगड़ रहे नमक, ग्रामीणों का आरोप- लेखपाल आकर उड़ाते हैं हमारा मजाक

बाढ़ पीड़ितों के जख्मों पर अब सरकारी कर्मचारी रगड़ रहे नमक, ग्रामीणों का आरोप- लेखपाल आकर उड़ाते हैं हमारा मजाक

Nitin Srivastva | Publish: Sep, 04 2018 01:28:21 PM (IST) | Updated: Sep, 04 2018 02:49:56 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

बाढ़ ग्रस्त इलाके के लोगों का कहना है कि लेखपाल को हमारे दुखों पर आती है हंसी...

बाराबंकी. जिले के तराई इलाकों में लोगों को घाघरा नदी में बढ़ रहे पानी से दोहरी मार ङोलनी पड़ रही है। एक तरफ तो तटवर्ती गांव के बाढ़ पीड़ित लगातार बारिश से परेशान हैं तो वहीं नदी की कटान भी उनके लिए मुसीबत खड़ी कर रही है। सैकड़ों बाढ़ पीडितों के घर और खेत नदी में समा चुके हैं। वहीं बाढ़ की मार झेल रहे गांव के निवासी प्रशासन के व्यवहार से भी काफी निराश हैं। बाढ़ पीड़ितों के मुताबिक सरकारी कर्मचारी द्वारा उनका मजाक बनाए जाने से भी वह काफी दुखी हैं। उनका कहना है कि वह प्रकृति की मार तो पहले से ही झेल रहे हैं, लेकिन अब सरकारी कर्मचारियों का ऐसा व्यवहार उनको ज्यादा दुख दे रहा है।

 

लोगों की बढ़ी मुसीबत

घाघरा के बढ़े जल स्तर से तटवर्ती गांवों में पानी फिर उफान मार रहा है। अगर इसी रफ्तार से पानी बढ़ा तो बाढ़ पीड़ितों के सामने और बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। आलम यह है कि सुबह जो घर सही सलामत नजर आता है, शाम होते-होते नदी की धारा उसे बदा ले जाती है। घाघरा के इस तांडव से परेशान लोगों के पास अब सिर पकड़कर बैठने के अलावा कोई और दूसरा चारा नहीं बचा है। कई गांव के बाढ़ पीड़ितों ने सरकारी कर्मचारियों पर अनदेखी और मजाक बनाने का आरोप लगाया, जो काफी हैरान करने वाला है।

 

 

 

लेखपाल पर लगाए गंभीर आरोप

कंचनापुर गांव के कई बाढ़ पीड़ितों ने अभिषेक नाम के एक लेखपाल पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। गांव के निवासी सलाहुद्दीन ने बताया कि लेखपाल आकर हमारा मजाक उड़ाते हैं। लेखपाल ने आकर मेरे भाई से कहा कि तुम लोगों ने शिकायत की है कि यहां कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही है। सलाहुद्दीन के मुताबिक नदी की कटान में हमारा घर गिर चुका है। पूरा का पूरा गांव नदी की कटान के चलते बेघर हो गया है और सराकारी कर्मचारी हमारे जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय उसपर नमक रगड़ने का काम कर रहे हैं।वहीं गांव के ही निवासी अयूब ने बताया कि प्रशासन की तरफ से जो भी मदद आती है वह बंधे तक ही रह जाती है, हम लोगों तक कुछ नहीं पहुंचता। गांव में सरकारी कर्मचारी भी कभी-कबार ही दिखाई पड़ते हैं।

 

नहीं मिल रही सरकारी मदद

वहीं बाढ़ पीड़ित मोहम्मद सलीम ने बताया कि घाघरा नदी की कटान के चलते लोग अपना घर तोड़ रहे थे। सतीम ने बताया कि गांव में ही उस्मान गनी नाम का शख्स भी अपना घर तोड़ रहा था। घर तोड़ने के दौरान ही वह गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। लेकिन गांव में कोई भी डॉक्टर इलाज के लिए नहीं आता। जो लोग आते हैं वह बंधे पर पहुंचकर वापस लौट जाते हैं। सलाम ने बताया कि गांव में सरकारी कर्मचारियों के खास लोग ही राहत सामग्री पाते हैं, बाकी लोगों तक कोई मदद नहीं पहुंचती। वहीं गांव की ही सुनीला ने बताया कि कटान में उनका घर तबाह हो गया है और हमारे बच्चे बेघर हो गए हैं। सुनीला के मुताबिक प्रशासन की तरफ से हम लोगों के रहने का कोई भी ईंतजाम नहीं किया गया है।

 

आरोपों की होगी जांच

वहीं बाराबंकी के अपर जिलाधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि नदी का जल स्तर अभी भी खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर है। उन्होंने बताया कि नदी की कटान काफी ज्यादा है। जिससे कई गांव ज्यादा प्रभावित हैं। लेखपाल द्वारा मजाक उड़ाए जाने के बाढ़ पीड़ितों के आरोपों पर संदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि कंचनापुर गांव में सबसे ज्यादा कटान हो रही है, लोग अपने घर कुछ तोड़ रहे हैं। अगर ग्रामीणों की ऐसी कोई शिकायत है तो उसकी जांच कराई जाएगी। मैं इस बारे में एसडीएम से बात करूंगा और जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। वहीं डॉक्टर के गांव में न पहुंचने पर अपर जिलाधिकारी ने कहा कि वह इस बारे में सीएमओ से जानकारी लेंगे और चिकित्सा की पूरी व्यवस्था गांवों तक पहुंचवाएंगे।

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