विनाशकारी घाघरा ने मचाया प्रलय, कई ग्रामीणों की हो चुकी है मौत

लाल निशान से 1.30 मीटर ऊपर बह रही है घाघरा, अस्पताल और गांव पानी में डूबे।

बाराबंकी. नेपाली नदियों का लाखों क्यूसेक पानी घाघरा नदी में छोड़े जाने के बाद उसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। विनाशकारी घाघरा इस समय खतरे के लाल निशान से 1 मीटर 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने बंधे पर अपना आशियाना बना लिया है। गांव के हालात दिनों दिन बेहाल होते जा रहे हैं।

 

हर तरफ पानी ही पानी

तहसील सिरौली गौसपुर के अंतर्गत घाघरा की बाढ़ से प्रभावित गांव गोबरहा, तेलिवारी और सनावा के हालात तो बद से भी बद्तर हो गए हैं। इन गांव के ग्रामीणों की गृहस्थी का सामान, फसलें, खाना बनाने का राशन सबकुछ घाघरा नदी की आगोश में समा चुका है। क्या बुजुर्ग, क्या महिलाएं और क्या छोटे छोटे बच्चे घाघरा का यह रौद्र रूप देखकर सभी सहमे हुए हैं। इन सभी ग्रामीणों ने अपने परिवार सहित बंधे पर जुटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के पास गैस सिलेंडर भी नहीं हैं और बंधे पर हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। लोग ऊंचाई पर बैठकर खाना बनाते हैं और किसी तरह अपने बच्चों का पालन पोषण करते हैं।

 

नहीं मिल रही कोई राहत

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या का कारण पानी का अभाव भी है। चारों तरफ पानी ही पानी होने से लोगों को वही दूषित बाढ़ के पानी को इस्तेमाल करना पड़ता है। उसी को वह पीते हैं। नहाने व खाना बनाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। जिससे अकारण ही बाढ़ पीड़ित गंभीर रोगों से ग्रसित हो जाते हैं। साथ ही साथ बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की सबसे बड़ी दिक्कत यहां रहने वाले जानवर और सांप व कई जहरीले जानवर भी हैं। जो रात के वक्त कभी भी निकल पड़ते हैं। जिनकी वजह से ग्रामीणो में दहशत है। सरकारी अस्पताल जलमग्न हो जाने से डॉक्टर भी बंधे पर बैठकर दवाइयां बांटने को मजबूर हैं। हालांकि अब तक पानी मे डूबकर 7 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं जिला प्रशासन व राजस्व विभाग की टीमें राहत व बचाव कार्य में लगी हुई हैं। लेकिन अगर बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों की मानें तो प्रशासनिक सहायता ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं।

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नितिन श्रीवास्तव
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