यहां हर साल सुल्तान मियां मानते हैं जन्माष्टमी, करते हैं मन्दिर की सजावट और प्रभु के श्रृंगार

यहां हर साल सुल्तान मियां मानते हैं जन्माष्टमी, करते हैं मन्दिर की सजावट और प्रभु के श्रृंगार

Akansha Singh | Publish: Sep, 05 2018 11:33:17 AM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 11:35:35 AM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

हिन्दू - मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल पेश की जा रही है बाराबंकी में जहां दोनों समुदाय पूरे भारत को एक नए भारत का दर्शन करवा रहे हैं।

बाराबंकी. देश की राजनीति ने लोगों को धर्म के आधार पर बांट दिया है। आज हिन्दू मुसलमानों के बीच एक ऐसी लकीर बन गयी है जहां इनका एक छत के नीचे इकठ्ठा होना मुश्किल हो गया है। मगर आज के इस नफरत वाले माहौल में भी भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव एक ताजे हवा के झोंके का अहसास कराता है। इस उत्सव में जहां एक ओर हिन्दू अपने आराध्य देव का जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं तो वहीं दूसरी तरफ मन्दिर के पण्डित के साथ एक मुस्लिम भाई भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेकर इसे यादगार बना देते है। हिन्दू - मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल पेश की जा रही है बाराबंकी में जहां दोनों समुदाय पूरे भारत को एक नए भारत का दर्शन करवा रहे हैं।


आत्मा को सुखद कराने वाला यह दृश्य है बाराबंकी के पुलिस लाइन के राधाकृष्ण मन्दिर का है, जहां भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव का उत्साह चरम पर था। इस मन्दिर में जहां सारी व्यवस्थाओं की देख रेख एक पण्डित भाई कर रहे थे तो वहीं भगवान के इस मन्दिर की सजावट और भगवान के श्रृंगार की जिम्मेदारी उठा रहे थे एक मुस्लिम भाई। पण्डित के साथ मुस्लिम भाई भी अपने बेटे के साथ भगवान के इस उत्सव की जिम्मेदारी के लिए पूरे जी जान से लगे हुए थे।

मन्दिर की सजावट और भगवान के श्रृंगार की जिम्मेदारी देख रहे बुजुर्ग सुल्तान मियां पिछले कई दशकों से यह काम पूरे मनोयोग से करते आ रहे हैं और अब वह चाहते है कि उनका बेटा भी उन्हीं की तरह उनके इस काम को आगे बढ़ाए। इसी नियत से वह अपने बच्चे को साथ लेकर आये हैं। सुल्तान मियां बताते हैं कि उन्हें इस काम से आत्मिक शान्ति मिलती है। इस काम को करने के दौरान वह समाज की चिन्ता छोड़ देते हैं कि कोई उन्हें क्या कहेगा। आखिर वह मुसलमान होकर हिन्दुओं के आराध्य भगवान कृष्ण के मन्दिर में क्या कर रहे हैं। इस काम के लिए कभी किसी हिन्दू ने या किसी मुसलमान ने उन्हें टोका भी नहीं। सुल्तान मियां कहते हैं कि अगर ऐसा ही माहौल पूरे देश में हो जाये तो देश में किसी समस्या का स्थान नहीं बचेगा।


मन्दिर के पुजारी पण्डित शिव बहादुर मिश्र बताते हैं कि सुलतान मियां हर साल जन्माष्टमी के दिन बगैर बुलाये मन्दिर में आते हैं और मन्दिर की सजावट और प्रभु के श्रृंगार का जिम्मा उठाते हैं। वह दोनों लोग मिलकर इस उत्सव को यादगार बना देते हैं। हम दोनों के मन में कोई धार्मिक या जातिगत भेदभाव नहीं है बल्कि एक इन्सानियत और भाईचारे का भाव है। भगवान कृष्ण प्रेम के प्रतीक है और हम दोनों समुदायों में प्रेम बांट रहे हैं। आधी रात के समय जब भगवान कृष्ण का प्राकट्य होगा तो इस विशेष अवसर को देखने तक हम दोनों लोग साथ-साथ रहेंगे जब भगवान का जन्म हो जाएगा तभी दोनों लोग शयन को जाएंगे।

इस जन्मोत्सव के लिए राजधानी लखनऊ में तैनात महिला पुलिस कर्मी सुषमा यादव ने बताया कि उनका स्थान्तरण लखनऊ हो गया है फिर भी वह यहां इस उत्सव में शामिल होने हर साल आती है और भगवान के कपड़े और सजावट का सामान भी वह अपने खर्चे से लाती हैं। सुलतान मियां के बारे में वह बताते हुए भावुक हो जाती है और बताती है कि जब वह काम करते - करते थक जाती है तो यही चच्चा उन्हें बुला कर कहते हैं कि भगवान का काम करने वाला कभी थकता नहीं है। इसलिए चाय पियो और फिर भगवान का काम करो। उनकी बातों से शरीर की पूरी थकान गायब हो जाती है। सुषमा यादव बताती है की जब वह सुल्तान चच्चा से यह कहने लगी कि आप का जब अन्तिम समय आएगा तो भगवान स्वयं आएंगे क्योंकि आप इतनी मेहनत उनके लिए करते हैं। उनके यह शब्द सुनकर चच्चा काफी भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए।

इन सब बातों का यह हल निकलता है कि समाज में अगर वह लोग है जो नफरतों को पैदा करते है तो कुछ ऐसे लोग भी है जो इस दकियानूसी राजनीति को समय रहते जवाब देकर भाईचारे की दीवार को कमजोर नही होने दे रहे है । समाज शायद ऐसे लोगों से ही बना है । जहाँ कृष्ण की भक्ति में डूबे हुए बाराबंकी में भी एक नए रसखान के दर्शन स्वयं भगवान कृष्ण करवा रहे है । समाज के ऐसे व्यक्ति के चरणों में हमारा नमन है।

Ad Block is Banned