दलित मुसलमानों की दुर्दशा के लिए पंडित नेहरू जिम्मेदार, अब मोदी से न्याय की आशा- वसीम राईन

ज्ञापन देने आए पसमांदा मुस्लिम समाज के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद वसीम राईन ने कहा कि उनकी प्रधानमंत्री से मांग है कि कांग्रेस ने जो हमारे पैरों में बेड़िया डाली थीं उन्हें वह काट दें।

By: नितिन श्रीवास्तव

Updated: 12 Aug 2020, 10:27 AM IST

Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

बाराबंकी. संविधान का निर्माण हुए अभी एक साल भी नहीं बीता था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार ने दलित मुसलमानों को साजिश के तहत दलितों को मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिया। लम्बे समय से यह मांग चली आ रही है कि जिस प्रकार हिन्दू दलितों को आरक्षण और आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं, ठीक वैसे ही मुस्लिम दलितों को भी आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए। प्रधानमंत्री से इसी मांग को लेकर एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से पसमांदा मुस्लिम समाज की ओर से भेजा गया। ज्ञापन देने आए पसमांदा मुस्लिम समाज के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद वसीम राईन ने बताया कि संविधान का निर्माण हुए अभी एक साल भी नहीं बीता था कि 10 अगस्त 1950 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने संविधान में एक पैरा और जोड़ दिया कि दलितों को मिलने वाला लाभ केवल हिन्दू दलितों को मिलेगा। बाद में इसमें सिखों को भी जोड़ दिया गया। लेकिन मुस्लिम और ईसाई दलित आज भी इससे वंचित है। इसका प्रभाव यह रहा कि मुस्लिम दलित मुख्यधारा से कट गए और आज तक राजनीति में उनके समाज का प्रतिनिधित्व नहीं हुआ। न वह सांसद बने और न ही विधायक। जब से केन्द्र में नरेंद्र मोदी आये हैं तबसे वह ऐतिहासिक फैसले ले रहे हैं। जैसे राम मंदिर, तीन तलाक और धारा 370। इन फैसलों के बाद मुस्लिम दलितों के अंदर भी एक आशा का संचार हुआ है कि अब उन्हें भी न्याय मिल जाएगा। उनकी प्रधानमंत्री से मांग है कि कांग्रेस ने जो हमारे पैरों में बेड़िया डाली थीं उन्हें वह काट दें।

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