5 साल संविदा पर काम करने वालो को सरकारी नौकरी, तो 20 साल वालों का क्या?

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का इधर जबसे एक आदेश चर्चा में आया है कि सरकारी नौकरी पाने से पूर्व 5 साल तक अनिवार्य संविदा की नौकरी करनी होगी।

By: नितिन श्रीवास्तव

Published: 15 Sep 2020, 03:11 PM IST

Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

बाराबंकी. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार एक ऐसा नियम लागू करने जा रही है, जिसमें युवाओं को सरकारी नौकरी करने से पूर्व 5 साल तक संविदा पर रहकर नौकरी करनी होगी। युवाओं को इससे सरकारी नौकरी पाने की आस जरूर बढ़ी होगी, साथ ही उनकी आशाओं को और बल मिला होगा जो पिछले 20-25 सालों से संविदा की ही नौकरी में जीवन खपा रहे हैं। आज बाराबंकी में ऐसे उन लोगों से बात की गयी जो पिछले काफी समय से ऐसी ही नौकरी कर रहे हैं। इसीलिए हम कह रहे है कि अगर 5 साल संविदा पर काम करने वालों को सरकारी नौकरी तो 25 सालों से काम कर रहे लोगों सरकारी नौकरी क्यों नहीं।

20 साल वालों का क्या?

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का इधर जबसे एक आदेश चर्चा में आया है कि सरकारी नौकरी पाने से पूर्व 5 साल तक अनिवार्य संविदा की नौकरी करनी होगी। यह आदेश सोशल मीडिया पर खूब चटखारे लेकर पढ़ा भी जा रहा है। इसको लोग अपने-अपने तरीके से ले भी रहे हैं। जहां प्रदेश के युवाओं में सरकारी नौकरी पाने की महत्वाकांक्षा को और बल दिया है, वहीं उन लोगों को भी खुशी दे रहा है जो जीवन का एक बड़ा हिस्सा संविदाकर्मी के रूप में ही दे चुके हैं। सवाल भी सही है कि अगर पांच सालों तक संविदा पर काम करना सरकारी नौकरी का मानक है तो वह तो इस मानक को कई बार पूरा कर चुके हैं।

सालों से संविदा पर कर रहे नौकरी

हम बात कर रहे हैं उद्यान विभाग में संविदा पर काम करने वाले मालियों की। यह माली पिछले 20 से 25 सालों से जिले के उद्यान और पार्कों को चमकाने, संवारने का काम करते आ रहे हैं। यह लोग बताते हैं कि उनकी मजदूरी का हिसाब लगाया जाए तो 200 रुपया प्रतिदिन ही आता है। वेतन आने की जहां तक बात है तो तीसरे, चौथे महीने ही आ पाता है। जनवरी से अब तक सिर्फ तीन माह का वेतन ही उन्हें मिल पाया है। उनसे पहले से भी काम करने वाले लोग अभी दैनिक वेतन या संविदा पर ही काम कर रहे हैं, तो उनका क्या होगा। उन्हीं के सामने कुछ लोगों को स्थायी नौकरी दी भी गयी है, लेकिन उन्हें नहीं मिली है। इसके लिए वह अदालत का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। अब तो केवल उम्मीद ही बची है उसी के सहारे जीवन चल रहा है।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned