जिले में गोद लेने वाला अभियान लाया रंग, टीबी मुक्त हुए 300 से ज्यादा बच्चे

अभियान के तहत जिले के आला अधिकारियों व विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने टीबी से पीड़ित 423 बच्चों को गोद लिया गया था।

बाराबंकी. टीबी रोग से पीड़ित बच्चों को स्वेच्छा से गोद लेने का जो अभियान शुरू हुआ था, वह रंग लाया। अभियान के तहत जिले के आला अधिकारियों व विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने टीबी से पीड़ित 423 बच्चों को गोद लिया गया था। जिसमें 302 से ज्यादा बच्चें पूरा इलाज करके छय रोग से मुक्त हो चुके है।

जिला क्षय रोग अधिकारी एवं नोडल डा अरूण कुमार वर्मा ने बताया कि वर्ष 2019 - 20 में 18 वर्ष तक के टीबी रोग से पीड़ित बच्चों को स्वेच्छा से गोद लेने का अभियान शुरू किया गया था । अभियान की शुरुआत में 1363 बच्चे टीबी से ग्रसित पाये गये थे, जिनकी उम्र 18 साल से कम थी। इनमें से 423 बच्चों को 50 अधिकारियों ने पांच-पाच कर गोद लिया था, इन अधिकारियों में 10 एडिशनल सीएमओं व एक फाइलेरिया निरीक्षक समेंत गैर संस्था, सामाजिक व व्यापारिक संगठन शामिल थे। उन्होने बताया कि गोद लिए गए बच्चों को सही समय पर दवा खिलाई गयी, इलाज का पूरा कोर्स करने में उनका हौसला बढ़ाया गया व इलाज के दौरान उनके पोषण का विशेष ध्यान दिया गया । यही वजह है कि 423 बच्चों में 302 बच्चे पूरी तरह क्षय रोग से मुक्त हो चुके हैं ।

डाक्टर वर्मा ने बताया कि टीबी (छय रोग) एक घातक संक्रामक रोग है। ये माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होता है। टीबी आमतौर पर फेफड़ों पर हमला करता है। मगर ये फेफड़ों के अलावा शरीर के ब्रेन, किडनी, रीढ़ की हड्डी व कुछ अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। ये रोग हवा के माध्यम से फैलता है। जब क्षय रोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई उत्पन्न होते हैं। जो कि हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है।

 

आप भी ले सकते हैं गोद

कोई भी सक्षम शख्स, संस्था, कॉरपोरेट हाउस, लायंस या रोटरी क्लब जैसी संस्थाएं टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद ले सकती हैं। क्षय रोग विभाग ने फिलहाल 18 साल से कम उम्र के बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए जिला क्षय रोग निवारण अधिकारी से संपर्क करना होगा। वहां से बच्चे का नाम मिलने के बाद उसके माता-पिता या अभिभावक की सहमति लेनी होगी। बच्चे का नाम सार्वजनिक न करने की शर्त का भी पालन करना होगा।

 

यह लक्षण दिखे तो जरूर करा लें जांच

जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि अगर छह प्रकार के लक्षण दिखाई दें तो कतई नजरंदाज न करें। इनमें दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी आना। खांसी के साथ बलगम व बलगम के साथ खून आना। वजन का घटना। बुखार व सीने में दर्द, शाम के समय हल्का बुखार होना। रात में बेवजह पसीना आना। भूख कम लगने जैसी समस्या है तो अवश्य ही अपनी जांच करा लें। जांच के उपरान्त समय पर इलाज हो जाने से टीबी ठीक हो सकता है।

 

ये सावधानी बरतें

खाने-पीने का ध्यान दें।

खांसी आने पर मुंह पर कपड़ा रख लें।

कोर्स पूरा होने के बाद बलगम की जांच कराएं।

नितिन श्रीवास्तव
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned