यहां अपने ही आशियाने पर हथौड़ा चलाने को मजबूर हैं ग्रामीण, बाढ़ पीड़ितों का यह दर्द आपको भी रुला देगा

अपने घरों को तोड़ते यह ग्रामीण बाराबंकी जनपद की तहसील सिरौलीगौसपुर इलाके के गांव तेलवारी के हैं।

बाराबंकी. सरयू नदी अब तक पूरे उफान पर थी और किनारे बसे सैकड़ों गांवों को अपनी जद में लेकर अपना विकराल रूप दिखा रही थी। मगर अब नदी का जलस्तर कम होने लगा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही हैं। यहां काफी घरों को नदी ने अपने आगोश में ले लिया है। जो बचे हैं उनके मालिक खुद घरों पर हथौड़ा चला रहे हैं, ताकि घर न सही उसकी ईंट ही बचा ली जाये।

तेलवारी गांव का मामला

अपने घरों को तोड़ते यह ग्रामीण बाराबंकी जनपद की तहसील सिरौलीगौसपुर इलाके के गांव तेलवारी के हैं। यह गांव सरयू नदी के किनारे बसे होने के कारण अब तक बाढ़ से जूझ रहा था। लोगों को उम्मीद थी कि जब नदी का जलस्तर कम होगा तो उनकी परेशानियों का अंत हो जाएगा। नदी का जलस्तर कम हुआ भी लेकिन कटान शुरू हो गयी। जिससें उनके घर नदी में एक-एक कर समाने लगे। जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गईं। नदी में घरों को समाते देखकर लोगों ने अपना घर खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया।

बाढ़ पीड़ितों की चिंता

यहां के ग्रामीणों ने अपने खेतों में फसल इस आशा से लगाई थी कि उससे भावी योजनाओं को पूरा किया जा सकेगा। मगर फसल भी नदी में समा गयी। जिससे उनके भविष्य पर सवालिया निशान लग गया। अब बाढ़ पीड़ितों की चिंता है कि उनके बच्चों की शादियां या अन्य मांगलिक कार्यक्रम कैसे होंगे। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि वह रात-रात भर जागकर पहरा देने का काम कर रहे हैं क्योंकि जहरीले जीव जन्तुओं का आना जाना लगा रहता है और रोशनी की व्यवस्था उनके पास नहीं है। बाढ़ पीड़ित सरकार से मांग करते हैं कि उन्हें अगर सौर उर्जा दे दिया जाए तो समस्या का काफी समाधान हो जाएगा। यहां के ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग सरकार से यह है कि गांव से हटाकर उन्हें कहीं सुरक्षित स्थान में जमीन दे दी जाए। जिससे वह वहां घर बनाकर रह सकें। यहां की तस्वीरें देख कर ग्रामीणों की मजबूरी साफ दिखाई देती है कि लोग अपना आशियाना बनाते हैं, मगर यहां कुछ तो मजबूरी होगी जो लोग अपने आशियाने पर खुद ही हथौड़ा चला रहे हैं।

नितिन श्रीवास्तव
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