अब भी घरों पर हो रहे प्रसव

सुरक्षित हाथों में संस्थागत प्रसव कराने के लिए काफी प्रयास किए जाने के बावजूद जिले में आए दिन घरेलू प्रसव हो रहे हैं, इससे प्रसव

By: Ghanshyam

Published: 15 Nov 2018, 12:35 PM IST

संस्थागत प्रसव का मामला

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को एक फीसदी का डंक
बारां. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुरक्षित हाथों में संस्थागत प्रसव कराने के लिए काफी प्रयास किए जाने के बावजूद जिले में आए दिन घरेलू प्रसव हो रहे हैं, इससे प्रसव के दौरान जटिलता होने की स्थिति में जच्चा-बच्चा की जान को जोखिम होने का अंदेशा रहता है। जिले में यूं तो 48 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हंै, लेकिन इसमें से करीब डेढ़ दर्जन में तो प्रसव ही नहीं हो रहे। पिछले सात माह के दौरान जिले मे करीब 13 हजार 544 संस्थागत प्रसव हुए हैं। इनमें से करीब 140 घरेलू प्रसव हुए हैं। इससे इतना तो कहा जा सकता है कि जिले में औसतन प्रतिमाह 20 प्रसव घरों पर हो रहे है। चिकित्सा सूत्रों की मानें तो घरों पर होने वाले प्रसव जागरूकता की कमी, साधन नहीं मिलने और प्रसव केन्द्रों की गांवों से अधिक दूरी होने से संस्थागत प्रसव का सौ फीसदी लक्ष्य हासिल नहीं हो रहा। कुछ केस ऐसे भी रहे, जिनमें परिजन प्रसव पीड़ा के बाद भी हरकत में नहीं आए।
यह है पीएचसी पर प्रसव की स्थिति
जिले में इस वर्ष अप्रेल 2018 से अक्टूबर माह तक बालदड़ा, बमूलिया माताजी, खजूरनाकला, आटोन, बड़ोरा, कुंजेड़, बटावदा, फतेहपुर, माथना, सीमली, सुंदलक, डींगाराडी, फलिया, कोलूखेड़ा, कोटड़ी, मोतीपुरा, मोतीपुरा चौकी, सेतकोलू आदि (पीएचसी) पर तो पिछले सात माह के दौरान एक भी प्रसव नहीं हुए है। जबकि जिले की अधिकांश पीएचसी पर लेबर रूम बने हुए हंै।
प्रसव प्वाइंटों की हालत ठीक
जिले में विभाग की ओर से 30 प्रसव प्वाइंट बनाए हुए हैं। इन पर चिकित्सक, एएनएम समेत लेबर रूम की उपलब्धता है। इसमें से जिला चिकित्सालय में सबसे अधिक प्रसव हो रहे हैं। इसके अलावा जिले के कुल 48 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी) में से अन्ता, अटरू, कवाई, छबड़ा, छीपाबड़ौद, केलवाड़ा, शाहाबाद, किशनगंज, मांगरोल, सीसवाली, बमोरीकला व हरनावदाशाहाजी 12 सीएचसी 15 पीएचसी व तीन उपस्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रसव कराए जा रहे हैं।
कहीं भवन नहीं, कहीं चिकित्सक का टोटा
सूत्रों का कहना है कि यूं तो जिले के सभी करीब 48 पीएचसी पर प्रसव कराए जाने की सुविधा होना चाहिए। लेकिन इनमें सें 15 पीएचसी पर ही सुरक्षित रूप से नियमित तथा औसतन प्रतिमाह दस व उससे अधिक प्रसव हो रहे हैं। शेष कुछ जगह चिकित्सक को लेकर समस्या है तो कहीं क्रमोन्नत हुई पीएचसी पर भवन में जगह की तंगी है।
& जिले में करीब 99 प्रतिशत प्रसव संस्थाओं पर ही हो रहे हैं। इससे अन्यों जिलों की अपेक्षा जिले में काफी बेहतर स्थिति है। अब हैल्थ वेलनेस सेन्टर व आदर्श पीएचसी पर 30 और प्रसव प्वाइंट बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिलाया गया है।
डॉ. सम्पतराज नागर, सीएमएचओ, बारां
रिपोर्ट - हंसराज शर्मा द्वारा
----------------------

Ghanshyam Bureau Incharge
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned