Baran--आधी आबादी किसे बताए पीड़ा ,जिले में हर माह हो रही एक प्रसूता की मौत

बारां. सरकार की ओर से जच्चा-बच्चा की देखभाल व उपचार व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जननी शिशु सुरक्षा योजना संचालित की हुई है। प्रसव प्वाइंट भी खोले हुए है तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) स्तर पर ऑपरेशन थियटर की भी व्यवस्था की हुई है, लेकिन गायनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक) का टोटा हैं।

आधी आबादी किसे बताए पीड़ा ,जिले में हर माह हो रही एक प्रसूता की मौत
बारां. सरकार की ओर से जच्चा-बच्चा की देखभाल व उपचार व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जननी शिशु सुरक्षा योजना संचालित की हुई है। प्रसव प्वाइंट भी खोले हुए है तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) स्तर पर ऑपरेशन थियटर की भी व्यवस्था की हुई है, लेकिन गायनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक) का टोटा हैं। जिले में जिला चिकित्सालय के अलावा मात्र अन्ता स्थित सीएचसी पर ही स्त्री रोग विशेषज्ञ नियुक्त हैं। शेष 13 सीएचसी पर स्त्री रोग विशेषज्ञों के पद खाली पड़े हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आधी आबादी किसे अपनी पीड़ा बताए और जननी की सुरक्षा कौन करें। विशेषज्ञों की कमी समेत विभिन्न कारणों के चलते जिले में प्रतिमाह औसतन एक प्रसूता की मृत्यु हो रही हैं।
प्रसव प्वाइंट पर नर्स एएनएम करा रही प्रसव
जिले में विभाग की ओर से करीब 30 प्रसव प्वाइंट बनाए हुए हैं। जिला चिकित्सालय, अन्ता, अटरू, छबड़ा, छीपाबड़ौद, केलवाड़ा, किशनगंज, शाहाबाद, मांगरोल, सीसवाली व समरानिया सीएचसी तथा पीएचसी जलवाड़ा, बमोरीकला, बामला, कोयला, कवाई, रेलावन, हरनावदाशाहजी, सारथल, देवरी, कस्बाथाना, भंवरगढ़, बजरंगगढ़, नाहरगढ़, पलायथा, पाली, जैपला तथा बड़ां, बवनगंवा व गरड़ा गांव स्थित सब सेन्टर को प्रसव प्वाइंट बनाए हुए हैं, लेकिन इनमें से मात्र दो जगह ही स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं। यहां नर्स व एएनएम ही प्रसव करा रही हैं।
बंद पड़े हंै अधिकांश थियेटर
जिले के अन्ता, मांगरोल, सीसवाली, मिर्जापुर व अटरू, कवाई, छीपाबड़ौद, हरनावदाशाहजी, छबड़ा, किशनगंज, नाहरगढ़, केलवाड़ा, समरानिया व शाहाबाद में सीएचसी है। सभी 14 सीएचसी पर स्त्री रोग विशेषज्ञ नियुक्त है तथा इनमें से कुछ को छोड़ अधिकांश पर ऑपरेशन थियेटर भी बने हुए है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों, सर्जन व एनेस्थिसिया के पद खाली पड़े होने के कारण यहां सीजेरियन नहीं हो रहे हैं। प्रसूताओं को बारां रैफर किया जा रहा है। इससे बारां जिला चिकित्सालय में प्रसूताओं की भीड़ रहती है, वार्ड अक्सर फुल रहते हैं। यहां जिला चिकित्सालय में औसतन प्रतिमाह करीब साढ़े छह सौ प्रसव हो रहे हैं। सीएचसी के ऑपरेशन थियेटरों को परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत नसबंदी शिविर के मौके पर ही खोला जाता हैं।
जिला चिकित्सालय में दबाव
हालांकि जिले में अप्रेल 2019 से दिसम्बर 2019 तक के दौरान करीब 17 हजार 78 प्रसव हुए हैं। औसतन प्रतिमाह 18 97 प्रसव हो रहे हैं, लेकिन इसमें से प्रतिमाह करीब साढ़े छह सौ प्रसव तो अकेले जिला चिकित्सालय में ही हो रहे हैं। सीजेरियन व अन्य जटिल स्थिति बनने पर प्रसूताओं को दूर-दराज क्षेत्र से बारां, कोटा रैफर करना पड़ रहा है। प्रसूताओं व उनके परिजनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा समय व जेब खर्च भी भारी पड़ रहा है।
& अन्ता में ही स्त्री रोग विशेषज्ञ है, वैसे सभी प्रसव प्वाईंट पर एसबीए प्रशिक्षित स्टाफ लगा हुआ है। नॉर्मल डिलेवरी तो स्टाफ ही करा देते हैं। सीजेरियन की जरूरत होने पर रैफर किया जाता है। पद भरने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया हुआ हैं।
डॉ. सम्पतराज नागर, सीएमएचओ

Shivbhan Sharan Singh Desk
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