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ये क्या.......मवेशी सड़कों पर और सरकार की नंदी गोशाला योजना फाइलों में

आवारा गोवंश बने परेशानी, सरकार की घोषणा अभी कागजों में, दुर्घटना की भी रहती है आशंका

बारां

Published: April 22, 2022 09:53:56 pm

मांगरोल. बीच सड़कों पर विचरण करते गोवंश व उनके ब़छड़े, बैलों से अभी भी निजात नहीं मिल पा रही है।चरने की जगह न होने से जानवर इधर उधर भटकते रहते हैं। खेती-किसानी के काम में बैलों की जरुरत तो अब रही ही नहीं। ऐसे में पैदा होने के बाद ही उन्हें सड़कों पर आवारा छोड़ दिया जाता है। बैल और बछड़़े दर-दर भटकने को मजबूर हो जाते हैं। होता यह है कि इन्हें बाहर से आने वाले व्यापार करने वाले लोग गााडिय़ों में भर बेचने के लिए इन्हें ले जाते हैं। कुछ दिनों बाद फिर इनकी संख्या बढ़ जाती है। यही हाल गायों का है। लोग गायों को पालना तो चाहते हैं, लेकिन बांधने की जगह नहीं है। ऐसे में सड़कों पर इन्हें खुला छोड़ देते हैं। उन्हें हरा चारा तो मिलता नहीं, पॉलीथिन या अन्य चीजें खाकर वे घर लौट जाते हैं। ऐसे में उनकी जान पर भी बन आती है। लेकिन इसका उपाय अभी तक निकाला जा सका है।

अब ज्यादा आफत
इस बार गेहूं का रकबा कम होने से चारे का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। पांच हजार में भी एक ट्रॉली चारा नहीं मिल रहा है। ऐसे में पशुपालकों के सामने वर्ष भर का चारा एकत्र करना भारी पड़ रहा है। यही हाल गौशाला का है। कार्यकर्ता दिनरात मेहनत के बावजूद वहां पलने वाली गायों के लिए चारे का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान में मौजूद गोवंश के लिए अब हरे चारे का रकबा बढा कर काम चलाने के उपाय किए जा रहे हैं। सोयाबीन की बुवाई के साथ मवेशियों से फसल को बचाना भारी होगा, लेकिन किसान भी गोशाला में चारा भेजने में रुचि नहीं ले रहे हैं। कारण भी साफ है उनके खुद के लिए ही चारा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सडकों पर घूमने वाले मवेशियों की संख्या बढती जा रही है। बीच सड़क पर ये मवेशी रास्ता रोककर खड़े हो जाते हैं। और थकने पर वहीं बैठ जाते हैं। इससे रास्ता तो रुकता ही है, दुर्घटना भी होती ही रहती हैं।

सरकार की घोषणा लागू नहीं
राज्य में सरकार बदलने व यहां के विधायक प्रमोद जैन भाया के गोपालन मंत्री बनने व उनके द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर नंदी गोशाला खोले जाने की घोषणा पर अब तक अमल नहीं हुआ है। न नंदी गोशालाओं के लिए जगह व गांव तय किया गया है। ऐसे में किसानों के सामने खेत में फसल बोने से लेकर काटने तक की समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है। नगरपालिका द्वारा संचालित कायन हाउस भी पिछले आठ साल से बंद कर दिया गया है।
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