वरिष्ठ चिकित्सक से ही चल रहा है काम

एक ओर से भारत की सबसे प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को समूचे विश्व में मान्यता दिलाने के लिए केन्द्र सरकार भरसक प्रयास कर रही है, दूसरी ओर देश में ही इस उपचार पद्धति को दोयम दर्जे के दौर से गुजरना पड़ रहा है। बारां जिले में इस चिकित्सा पद्धति के हाल देख यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है।

बारां. एक ओर से भारत की सबसे प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को समूचे विश्व में मान्यता दिलाने के लिए केन्द्र सरकार भरसक प्रयास कर रही है, दूसरी ओर देश में ही इस उपचार पद्धति को दोयम दर्जे के दौर से गुजरना पड़ रहा है। बारां जिले में इस चिकित्सा पद्धति के हाल देख यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है। यहां पिछले पौने तीन साल में सरकार एक मात्र उपनिदेशक के पद पर नियुक्ति नहीं कर पाई है। हां, यह जरूर है कि इस अवधि में जिले के सबसे वरिष्ठतम आयुर्वेद चिकित्सक को व्यवस्था के रूप में नियुक्त किया जाता रहा। अब तक इस पद पर नौ चिकित्सक तैनात किए गए हैं, लेकिन उन्हें भी बाद में सेवानिवृत्ति हो जाने से दो से चार माह ही काम करने का मौका मिल सका है। वरिष्ठ चिकित्सक उपनिदेशक का पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग की कार्य प्रणाली समझता है, तब तक उसका सेवाकाल पूरा हो जाता है। इसके बाद फिर अन्य वरिष्ठ चिकित्सक को लगाया जाता है। विभाग में एक कनिष्ठ सहायक को छोड़कर बाकी सभी पद भी खाली पड़े हैं। ऐसे में विभाग को आसपास के अस्पतालों के चिकित्सकों व कर्मचारियों को बुलाकर काम चलाना पड़ता है।
कनिष्ठ सहायक के भरोसे कार्यालय
जिला मुख्यालय स्थित आयुर्वेद विभाग का जिले के सभी आयुर्वेदिक औषधालयों व चिकित्सालयों पर नियंत्रण है। यहां से ही जिले के चिकित्सालय व औषधालयों के लिए बजट जारी होता है। चिकित्सकों, कर्मचारियों का वेतन, अवकाशों की स्वीकृत्ति, योजनाओं का संचालन, बजट भेजना सहित अन्य कार्य भी इसी कार्यालय के जिम्मे हैं। वर्तमान में यहां एक कनिष्ठ सहायक का पद भरा हुआ है, शेष सभी पद रिक्त हैं।
तब से ऐसे रहे हैं यहां हालात
मार्च 2015 के बाद बारां जिले को जिला आयुर्वेदिक अधिकारी नहीं मिला है। मार्च 2017 में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी लगाया था, लेकिन वह भी एक माह में सेवानिवृत्ति हो गए।
दिसंबर 2017 में जिला आयुर्वेद अधिकारी का पद खत्म करके उपनिदेशक पद स्वीकृति किया गया लेकिन फिर भी पद नहीं भरा गया। यहां सेवानिवृत्ति से कुछ माह पहले जिले के सबसे वरिष्ठ चिकित्सक को उपनिदेशक लगाया जाता है। कुछ माह कार्य करने के बाद वह सेवानिवृत्ति हो जाते हैं। वर्तमान में कार्यरत उपनिदेशक जुलाई 2019 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
जुगाड़ से चला रहे व्यवस्था
वरिष्ठ सहायक का पद 10 साल से खाली है। इसके अलावा उपनिदेशक, सहायक निदेशक, सहायक लेखाधिकारी द्वितीय का पद खाली है। अस्पतालों के अनुभवी चिकित्सकों व कर्मचारियों र्का कार्य की अधिकता होने पर कुछ घंटों के लिए बुलाया जाता है। व्यवस्था के तौर पर सहायक नोडल अधिकारी व दो नर्सिंग कर्मचारियों को लगाया है।
कनिष्ठ सहायक को छोड़कर अस्पताल के सभी खाली चल रहे हैं। अस्पताल के अनुभवी चिकित्सकों व कर्मचारियों को बुलाकर काम लेना पड़ता है। रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
मधुसुदन वैष्णव, उपनिदेशक, आयुर्वेदिक विभाग, बारां

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