आरोपियों पर कार्रवाई नहीं, भुगत रहे ग्रामीण

हरनावदाशाहजी. कस्बे में ग्राम सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित मिनी बैंक में हुए लाखों रुपए के गबन के बाद से ना तो मिनी बैंक के ताले खुल रहे हैं और ना ही सहकारी समिति भवन के। ऐसे में अपने ही रुपए के लिए भटक रहे लोगों को स्थानीय स्तर से लेकर उच्चाधिकारियों तक कोई संतोषप्रद जवाब देने वाला नहीं है।

By: Mahesh

Published: 29 Mar 2019, 05:45 PM IST

हरनावदाशाहजी. कस्बे में ग्राम सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित मिनी बैंक में हुए लाखों रुपए के गबन के बाद से ना तो मिनी बैंक के ताले खुल रहे हैं और ना ही सहकारी समिति भवन के। ऐसे में अपने ही रुपए के लिए भटक रहे लोगों को स्थानीय स्तर से लेकर उच्चाधिकारियों तक कोई संतोषप्रद जवाब देने वाला नहीं है। जिससे लोगों में अब आक्रोश बढता जा रहा है। कस्बे में संचालित सहकारी समिति का कामकाज तो चल रहा है लेकिन उसका ऑफिस बारां केंद्रीय सहकारी बैंक के छीपाबड़ौद कार्यालय में बैठकर चलाया जा रहा है। ऐसे में यहां पर लोगों को जवाब देने के लिए पांच साल से लोगों को कोई मिलता नहीं। लोगों का आरोप है कि बिना धणी धोरी के ना तो संपति की सार संभाल हो रही है और ना ही संपत्ति से मिलने वाली किराए की राशी की वसूली। ऐसे में कोढ में खाज का काम करने वाली स्थिति लोगों की पीड़ा को बढ़ा रही है।
नहीं हो रहा निस्तारण
सहकारी समिति में हुए गबन के बाद यहां पर करीब चार सौ कट़टे डीएपी खाद के बेकार पड़े होकर खराब हो रहे हैं। उसको लेकर ना तो जिम्मेदार कर्मचारी गंभीर हैं और ना ही आला अधिकारी। जबकि इस खाद को वापस बेचने के लिए सहकारी ने जीएसटी नम्बर लेने के लिए भी पैसे खर्च किए। उसके बावजूद लाखों रुपए का खाद धूल धूसरित हो रहा है। इस बारे में बारां के अधिकारियों से जब भी बात की जाती है तो एक दूसरे पर टालमटोल करते नजर आते हैं लेकिन कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाता।
पुराने ढर्रे पर ही चल रहा किरायानामा
सहकारी समिति की मुख्य बाजार में स्थित भवन में करीब आधा दर्जन दुकानें हैं जो किराए पर चल दे रखी है लेकिन पुराने ढर्रे पर चल रही दुकानों का किराया भी पुराने ढर्रे का ही है। जबकि वसूली भी करने वाला कोई नहीं है।
जिससे भी सहकारी समिति को मिलने वाली बडी आय पर किसी का ध्यान नहीं है। जबकि बैंक में जमा कराए लोगों के लाखों रुपए लेने के लिए लोगों को दर दर भटकना पड़ रहा है।
खातेदारों का आरोप है कि पूर्व जिला कलक्टर से भी इसकी शिकायत की थी लेकिन फिर भी कुछ राहत नहीं मिल पाई। एम डी एवं रजिस्ट्रार कई बार बदल गए जिससे जांच कार्य प्रभावित तो हुआ ही वहीं जिम्मेदारी कोई भी लेने को तैयार नजर नहीं आता। ऐसे में आक्रोशित लोगों ने गत सहकारी समिति के चुनाव प्रक्रिया का विरोध करते हुए एक भी नामांकन नहीं भरा था जिससे चुनाव खारिज हो गए थे। लेकिन एक साल बाद भी ना तो चुनावों को लेकर कोई सुगबुगाहट है और ना ही लोगों के रुपए देनदारी की व्यवस्था का। ऐसे में अब लोगों में रोष बढता जा रहा है।
ये है मामला
कस्बे में ग्राम सेवा सहकारी समिति ने मिनी बैंक का संचालन शुरु किया था जिसमें कस्बे समेत गांवों से बडी संख्या में नरेगा श्रमिकों से लेकर व्यापारी वर्ग तक ने खाते खुलवाकर पूंजी जमा करवाई थी। लेकिन करीब छह साल पूर्व कर्मचारियों एवं व्यवस्थापक के द्वारा किए गबन के बाद से लगभग पचास लाख से ज्यादा की देनदारी रकम फाइलों में अटक गई। उसके बाद मामला कोर्ट कचहरी में चल रहा है लेकिन दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से अभी तक खातेदारों को राहत नही मिल पा रही।
& अतिरिक्त चार्ज होने के कारण फिलहाल छीपाबड़ौद से ही सहकारी समिति का संचालन कर रहे हैं। देनदारी चुकाने के लिए चार माह पूर्व सहकारी के गोदाम व अन्य भवन की नीलामी के लिए फाइल जयपुर रजिस्ट्रार को भिजवाई थी लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया। मिनी बैँक बंद पड़ी है,,
ललित कुमार कार्यवाहक व्यवस्थापक हरनावदाशाहजी
& एम डी व जिला कलक्टर को इसकी शिकायत करो । फिर भी कुछ कार्रवाई नहीं होती है तो मुझे आकर बताना। मैं इस मामले को दिखवाता हूं।
डॉ. नीरज के पवन रजिस्ट्रार जयपुर

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