बाजार में भाव नहीं,सरकारी कांटों पर उठाव नहीं , लहसुन नहीं बिकने पर ही कर रहे आत्महत्या

लहसुन उत्पादन किसान अवसाद में आ रहे हैं, लेकिन कहीं से संबल नहीं मिल रहा।

By: Shivbhan Sharan Singh

Published: 24 May 2018, 08:55 PM IST

बारां. महीनेभर की अवधि में जिले में तीन किसानों ने आत्महत्या कर ली। लहसुन उत्पादन किसान अवसाद में आ रहे हैं, लेकिन कहीं से संबल नहीं मिल रहा। बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत जिले में लहसुन की सरकारी खरीद शुरू हुए तीन सप्ताह से अधिक समय हो गया, जिले में ४ लाख ४० हजार क्विंटल लहसुन खरीद का लक्ष्य रखा गया, लेकिन अब तक इसकी दस फीसदी खरीद भी नहीं हो पाई है। २१ हजार से अधिक किसानों ने सरकारी कांटे पर लहसुन बेचने को पंजीयन कराया, लेकिन अब तक हजार किसान ही लहसुन बेच पाए हैं। सरकारी कांटे पर भाव ठीक है तो बारी नहीं आ रही, उधर मंडियों में काफी कम भाव पर लहसुन बिक रहा है। किसान इस समय दुविधा में है। तापमान बढऩे के साथ तो किसानों की सांसें फूलने लगी है क्योंकि इससे लहसुन की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।
अब कितना खरीद पाएंगे
लहसुन खरीद की निर्धारित अवधि ३१ मई तक है। उक्त अवधि तक अब कितने किसान समर्थन मूल्य के कांटों पर अपना लहसुन बेच पाएंगे, यह अब तक की खरीद से पता चल रहा है। ४ लाख ४० हजार क्विंटल लक्ष्य के विपरीत अब तक दस फीसदी भी लहसुन नहीं खरीदा जा सका है। जिले में पांच केन्द्रों पर लहसुन खरीद हो रही है, लेकिन आए दिन खरीद में व्यवधान से किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। पहले तो तय समय पर खरीद शुरू नहीं हो पाई, फिर शुरू हुई तो अव्यवस्थाएं व नियम हावी हो गए।
कहां तक संभालकर रखें
जो किसान सरकारी कांटों पर लहसुन बेचने को ऑनलाइन पंजीयन करा चुके, वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच तापमान में लगातार बढ़ोतरी से लहसुन की गुणवत्ता पर असर पडऩे की आशंका से किसानों की हालत पतली हो रही है।
मंडी में यह है हाल
बारां कृषि उपज मंडी स्थित लहसुन मंडी में लहसुन बेचने आ रहे किसान लहसुन तो बेच रहे हैं, लेकिन चेहरों पर खुशी नहीं है। बारां मंडी में लहसुन ३ रुपए से २५ रुपए किलो तक बिक रहा है वहीं औसत भाव डेढ़ हजार रुपए क्विंटल के आस-पास चल रहा है। ज्यादातर किसानों का कहना था कि घर की आवश्यक जरूरतों की पूर्ति के लिए टुकड़ों में लहसुन बेच रहे हैं। किसान महापंचायत के प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह ने कहा कि लहसुन खरीद के नाम पर किसानों को धोखा दिया जा रहा है। सरकारी कांटों पर भाव ठीक हैं तो खरीदा नहीं जा रहा। ऐसे में किसान क्या करें। खुले बाजार में जितने में लहसुन बिक रहा है, उससे तो लागत भी पूरी नहीं निकल रही।

Shivbhan Sharan Singh
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