कहीं लाडो को तो नहीं रोक रहे!

कहीं लाडो को तो नहीं रोक रहे!

Shivbhan Sharan Singh | Publish: Feb, 15 2018 10:51:30 PM (IST) Baran, Rajasthan, India

***** परीक्षण पर प्रभावी रोक लगाई जा रही है तो कोख में ही शिशुओं का गला घोंटने के मामले बढऩे लगे हंै। हर रोज सरकारी व गैरसरकारी चिकित्सा संस्थानों में

बारां. ***** परीक्षण पर प्रभावी रोक लगाई जा रही है तो कोख में ही शिशुओं का गला घोंटने के मामले बढऩे लगे हंै। हर रोज सरकारी व गैरसरकारी चिकित्सा संस्थानों में गर्भपात हो रहे हैं। शिशु जन्म को रोकने के लिए इस तरह के प्रकरणों की संख्या बढऩे लगी तो स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। फिलहाल जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में गत महीनों के दौरान हुए गर्भपात प्रकरणों को खंगाला जा रहा है। जिले में वित्तीय वर्ष की पहले छह माह में करीब 273 महिलाओं ने गर्भपात कराया है। इन आंकड़ों के मुताबिक जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में हर माह करीब 45 गर्भपात हो रहे हैं। इसमें कुछ मामलों में बालिका अथवा अनचाहे जन्म को रोकने के लिए गर्भपात कराने का अंदेशा जताया जा रहा है। आगामी दिनों में गर्भपात के कारणों की जांच की जाएगी।

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अन्ता में अधिक प्रकरण
वर्ष 2017 में अप्रेल से सितम्बर 2017 के दौरान जिले के पांच ब्लॉक अन्ता, किशनगंज, शाहाबाद, छीपाबड़ौद व छबड़ा में सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सा संस्थानों व घरों पर कुल 273 गर्भपात हुए हंै। इसमें 90 गर्भपात अन्ता-मांगरोल क्षेत्र में हुए। जबकि शाहाबाद में 71, छीपाबड़ौद में 52, छबड़ा में 32 व सबसे कम किशनंगज ब्लॉक में गत छह माह के दौरान 28 गर्भपात हुए हंै।

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यूं हुई आवश्यकता
जिले में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए पीसीपीएनडीटी के तहत ***** परीक्षण पर प्रभावी रोक लगाई जा रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से ***** परीक्षण कराने वालों के खिलाफ डिकॉय ऑपरेशन भी किए जा रहे हंै। जिले से सटे मध्यप्रदेश में भी गत दिनों डिकॉय ऑपरेशन कर इसमें सम्मलित लोगों को गिरफ्तार कर प्रभावी कार्रवाई की गई थी। इसके चलते जिले के सीमावर्ती ब्लॉक क्षेत्र में हो रहे गर्भपात की कुंडली खंगाली जा रही है।
ऐसे लेंगे जानकारी
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम मिशन निदेशक के निर्देशानुसार गर्भपात कराने वाली महिलाओं की ब्लॉकवार सूचियां तैयार की जा रही हैं। इसके बाद एक-एक महिला को चिन्हित किया जाएगा। क्षेत्र की आशा सहयोगिनी व एएनएम महिलाओं से सम्पर्क करेंगी। इसके लिए आशा व एएनएम को निर्धारित प्रश्नावली प्रपत्र दिया जाएगा। सम्बंधीत महिलाओं से पूछकर प्रपत्र को भरा जाएगा। इसमें गर्भपात कराने के कारण, गर्भपात करने के लिए उपयोग किए गए गोली व अन्य दवा तथा इन दवाओं की उपलब्धता आदि के बारे में जानकारी ली जाएगी।
वर्जन

-गर्भपात के प्रकरणों की निर्धारित प्र-पत्र के तहत ट्रैकिंग कराई जाएगी। इसमें वास्तविक कारणों की जानकारी सामने आएगी। फिलहाल कुछ ब्लॉक की सूची तैयारी की जा रही है।

डॉ. बृजेश गोयल, सीएमएचओ, नोडल अधिकारी , पीसीपीएनडीटी

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