उदासीनता की भेंट चढ़ा हर्बल गार्डन

नाहरगढ़. लगभग 10 साल पहले शुरू किया गया हर्बल गार्डन सरकार के लिए गले की हड्डी बना हुआ है।

नाहरगढ़. लगभग 10 साल पहले शुरू किया गया हर्बल गार्डन सरकार के लिए गले की हड्डी बना हुआ है। पीपीपी मोड पर किसी प्राइवेट एजेंसी द्वारा रुचि नहीं दिखाने पर अब सरकार इसे मनरेगा योजना के तहत विकसित करने पर विचार कर रही है। नाहरगढ़ में गुना रोड पर स्थित हर्बल गार्डन को विकसित करने के लिए पहले प्रमुख शासन सचिव द्वारा आयुर्वेद निदेशक को पत्र लिखा गया। उसके बाद आयुर्वेद विभाग के निदेशक द्वारा जिला परिषद को पत्र लिखकर मनरेगा योजना के तहत विकसित करने की योजना बनाने के निर्देश दिए थे। स्थानीय आयुर्वेद विभाग द्वारा हर्बल गार्डन में समतलीकरण और पौधे विकसित करने की संभावना को लेकर दूरभाष पर बताया गया व पत्र भी लिखा गया। लेकिन हर्बल गार्डन को नरेगा से किस तरह विकसित किया जाए इसको लेकर आयुर्वेद विभाग द्वारा जिला परिषद को मार्गदर्शन नहीं दिया गया। अब जिला परिषद में स्थित नरेगा सेल के अधिकारी भी आयुर्वेद विभाग पर रुचि नहीं लेने का आरोप लगाकर अपने कर्तव्य से पल्ला झाड रहे हैं। दोनों विभागों ने एक दूसरे को कई पत्र लिखे लेकिन हर्बल गार्डन को विकसित करने की योजना आगे नहीं बढ़ सकी है। हर्बल गार्डन राजस्थान मेडिसिन प्लांट बोर्ड के अधीन संचालित हो रहा है। इसकी मॉनिटरिंग जिला स्तरीय आयुर्वेद विभाग द्वारा की जा रही है। हर्बल गार्डन में अभी तक चारदीवारी निर्माण ही पूर्ण हो पाया है। तीन.चार साल पहले बजट में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा एक करोड़ चालीस लाख की राशि चारदीवारी निर्माण के लिए दी गई थी । इस राशि से दो साल पहले ही चारदीवारी निर्माण पूर्ण हो गया है। लगभग 10 साल पहले करवाए गए निर्माण कार्य भी बदरंग ओर जीर्ण शीर्ण हो गए हैं।
चारदीवारी टूटती रहती है
जिस जगह हर्बल गार्डन का निर्माण है उसके निचले हिस्से में तालाब है ऐसे में हर्बल गार्डन में नाला बहता है । पिछले साल जिस जगह दीवार टूटी थी वहां पानी का निकास नहीं रखा गया था। पानी का दबाव बढऩे से दीवार टूट गई थी इस बार तालाब के नजदीक वाले हिस्से की दीवार टूट गई।
चार पांच साल पहले भी घटिया निर्माण के चलते दीवार टूट गई थी। किशनगंज स्थित नरेगा सेल के कनिष्ठ अभियंता इमरान खान ने बताया कि मैंने आयुर्वेदिक विभाग के नाहरगढ़ स्थित हर्बल गार्डन का मौके पर जाकर निरीक्षण किया था लेकिन इसको किस तरह विकसित करना है । यह आयुर्वेद विभाग द्वारा अभी तक नहीं बताया गया।
चोरों की भी नजर
दूसरी ओर हर्बल गार्डन में चोरी की वारदातें रुकने का नाम नहीं ले रही। चौकीदार होने के बावजूद पिछले 7.8 साल में हर्बल गार्डन में कई बार चीजें चोरी चली गई। पहले तार फेंसिंग की चोरी की वारदात होती रहती थी। चोर मोटर ही चुरा ले गए। ऐसे में हर्बल गार्डन में लगाए चौकीदार, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों व नोडल प्रभारी की लापरवाही की पोल खुल रही है।
नहीं दिखा रहा कोई रुचि
इस हर्बल गार्डन को राज्य सरकार ने पीपीपी मोड पर देने का प्रयास किया था लेकिन किसी भी प्राइवेट संस्था द्वारा इसे लेने में रुचि नही दिखाई। जिससे मामला खटाई में पड़ गया। आप जब सरकार हर्बल गार्डन को नरेगा में विकसित करना चाहती है तो विभाग के अधिकारी रुचि नहीं दिखा रहे।
& प्रमुख शासन सचिव व आयुर्वेद विभाग के निदेशक से जिला परिषद में पत्र आया था उसके बाद आयुर्वेद विभाग को कई पत्र लिखे लेकिन विभाग के अधिकारी ही इसे नरेगा में विकसित करने में रुचि नहीं दिखा रहे । ऐसे मैं अभी तक कार्य योजना आगे नही बड़ सकी है।
मथुरा लाल मीणा अधिशासी अभियंता जिला परिषद बारां
& जिला परिषद से हर्बल गार्डन को विकसित करने के लिए पत्र आया था । इसके लिए हमने उसके समतलीकरण और पौधे लगाने के लिए पत्र लिखकर सहमति भी जताई थी लेकिन जिला परिषद के नरेगा के अधिकारी रुचि नहीं दिखा रहे।
जगदीश प्रसाद शाक्यवाल वैध एवं नोडल प्रभारी हर्बल गार्डन

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