खनन पर रोक के बाद भी रोज लगती है बजरी की मंडी

सुप्रीम कोर्ट की रोक बावजूद जिले में बजरी व पत्थर के अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग रहा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में अवैध खनन कर माफिया मौज काट रहे हैं। इनका खुला खेल देखने के लिए दूर-दराज के गांव व कस्बों में जाने की जरूरत नहीं हैं। बारां जिला मुख्यालय की लंका कॉलोनी के रावणजी का चौक में रोजाना सुबह लगने वाली रेत की मंडी में चले जाइए, वहां दर्जनों टै्रक्टर-ट्रालियां बजरी से भरी खड़ी की जाती है

By: Dilip

Updated: 19 Jan 2019, 12:04 PM IST

बारां. सुप्रीम कोर्ट की रोक बावजूद जिले में बजरी व पत्थर के अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग रहा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में अवैध खनन कर माफिया मौज काट रहे हैं। इनका खुला खेल देखने के लिए दूर-दराज के गांव व कस्बों में जाने की जरूरत नहीं हैं। बारां जिला मुख्यालय की लंका कॉलोनी के रावणजी का चौक में रोजाना सुबह लगने वाली रेत की मंडी में चले जाइए, वहां दर्जनों टै्रक्टर-ट्रालियां बजरी से भरी खड़ी की जाती है, बजरी बेचने के लिए। खरीदार आते हैं, बजरी देख मोलभाव करते हैं और सौदा पटने पर इन्हें अपने निर्माण स्थल पर ले जाते हैं। इस दौरान खनन विभाग व पुलिस के अलावा प्रशासन का कोई कारिंदा इन्हें रोकने-टोकने नहीं आता। यह हाल प्रदेश में सरकार बदलने के साथ जिले के अन्ता से निर्वाचित विधायक प्रमोद जैन भाया के खान मंत्री बनने के बाद भी नहीं बदले हैं।
जिले में अब एक भी लीज नहीं
पूर्व में जिले में गबजरी की तीन लीज थी, लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में यह तीनों भी बंद कर दी गई है। ऐसे में जो बजरी जिलेभर में बेची जा रही है, वो सौ फीसदी अवैध है। खनिज विभाग के सूत्रों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि अवैध बजरी खनन पर कार्रवाई नहीं करते। कई बार बजरी से भरी ट्रॉलियां पकड़ी हैं तथा बजरी का अवैध दोहन करने पर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से २७ हजार १०० रुपए जुर्माना वसूलने के बाद ही उसे छोड़ा जाता है, लेकिन बजरी की मांग अधिक होने से बजरी माफिया जुर्माना भरने के बाद फिर से अवैध खनन में लग जाते हैं।
जितनी ज्यादा मांग, उतने अधिक दाम
इस अवैध बजरी का दस्तूर पूरी तरह व्यापारिक होता है। बजरी की मांग के अनुसार इसके दाम घटते बढ़ते रहते हैं। शुक्रवार को मौके पर पहुंचे इस प्रतिनिधि ने जब बजरी का मोलभाव करना शुरू किया तो बजरी माफियाओं ने चार से लेकर पांच हजार रुपए ट्रॉली तक भाव बोले। भाव में अन्तर का करण समझाते हुए बताया कि कम भाव वाली बजरी छोटे-मोटे खाळों की है, जिसमें मिट्टी की मात्रा अधिक है। वहीं अधिक भाव वाली बजरी पार्वती नदी की बताने के साथ कहा इसकी अच्छे से धुलाई की हुई है। इसमें मिट्टी की मात्रा न के बराबर है।
रोजाना आती हैं 50 से 100 ट्रॉलियां
शहर में खुलेआम प्रशासन की नाक केे नीचे लगने वाली बजरी मंडी में रोजाना 50 से 100 ट्रॉली बजरी आती है, जो शहर में चल रहे निर्माण कार्यों में आसानी से खप जाती है। इनमें अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉलियां शहर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित पार्वती नदी से भरी जाती है। इस नदी में अटरू से बारां तक कई स्थानों से अवैध रूप से बजरी का खनन किया जाता है। इसके अलावा शहर के बरडिया क्षेत्र के अलावा कई छोटे-बड़े नालों से भी बजरी का खनन किया जाता है। यह सब खुलेआम होता है, लेकिन खनन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की इस पर नजर नहीं पड़ती।
तड़के से ही रेलमपेल, लोग परेशान
रावणजी के चौक में पहुंचने का रास्ता घनी आबादी के बीच से है। इसके मुख्य मार्ग पर लंका कॉलोनी में मकान बने हुए हैं, इसी रास्ते पर कई स्कूल, मंदिर, मस्जिद व सरकारी डिस्पेंसरी भी होने से दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। बजरी माफिया इस मार्ग पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ाते रहते हैं। इससे हर पल दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। कई बार दुर्घटनाओं कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। हादसे होने के बाद पुलिस के पहुंचने से बजरी माफिया इधर-उधर हो जाते हैं।

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