कई बस्तियों में अब भी लोग प्यासे,जलाशयों का निर्माण हो तो बने बात

मांगरोल. स्थानीय नगरपालिका क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को आजादी के इतने सालों बाद भी पीने का पर्याप्त पानी मयस्सर नहीं हो रहा।

By: Shivbhan Sharan Singh

Published: 25 Apr 2018, 06:26 PM IST

मांगरोल. स्थानीय नगरपालिका क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को आजादी के इतने सालों बाद भी पीने का पर्याप्त पानी मयस्सर नहीं हो रहा। बरसों से लोगों को पानी नहीं मिल रहा और जो मिल रहा था वह पीने योग्य नहीं था। फिर भी कई सालों तक फ्लोराइड युक्त पानी ही यहां के बाशिंदे पीते रहे। 1994 में स्वीकृत योजना कछुआ चाल चलते चलते 2015 में पूरी हुई और लोगों को पानी मिलने लगा तो वह भी पूरी आबादी की प्यास बुझाने में नाकामयाब रही। वर्तमान हालात यह हैं कि कई बस्तियों के लोग अब भी प्यासे ही हैं। कांग्रेस सरकार में योजना शुरु करने के प्रयास हुए तो इसके बाद आई सरकार ने कुछ नहीं किया। ऐसे में आधी अधूरी योजना अब लोगों के लिए सिरदर्द बनी है। कांग्रेस ने इस योजना को शुरु कराकर राजनीतिक लाभ तो उठा लिया, लेकिन 1991 की जनसंख्या को आधार मानकर 2014 तक के लिए पर्याप्त मानी जाने वाली यह योजना देर से शुरु होने के कारण आबादी का विस्तार होने से नगर के सभी उपभोक्ताओं को पानी पहुंचाने में नाकामयाब रही। ऐसे में करोड़ों खर्चने के बाद भी भरी दुपहरी में यहां के उपभोक्ता पानी की जरुरत पूरी करने के लिए भटकते रहते हैं। बारां रोड स्थित बस्ती के लोग तो तीन किमी दूर नहर के पास लगे हैंडपंप से पानी लाकर अपनी जरुरत पूरी कर रहे हैं। यहां स्थित कार्यालय में दो महिला बैलदार, तीन हैल्पर व एक कनिष्ठ अभियंता नियुक्त है जिसे भी बारां का अतिरिक्त चार्ज दे रखा है।
कई बस्तियां वंचित
नगरपालिका क्षेत्र की भगवानपुरा, करीमनगर, जनताटोडी, सती चबूतरा समेत कई मोहल्लों में पाइप लाइनें तो डल गई, लेकिन अब भी यहां पानी का वितरण शुरु नहीं किया जा सका है। मोतीकुआं वार्ड 19 के कुछ क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए इंटर कनेक्शन कर पानी देने के प्रयास भी किए। इसके बाद भी मोतीकुआं क्षेत्र में एकांतरे ही जलापूर्ति हो रही है।
हैंडपंपों के हालात ऐसे
नगरपालिका क्षेत्र में कुल 165 हैंडपंपों में से दस नाकारा हो गए। इनके बजाय नए हैंडपंप नहीं लगे। वहीं गर्मी की शुरुआत हो गई। खराब हैंडपंपों की संख्या बढ़ रही हैं और इन्हें ठीक करने के काम की शुरुआत अब भी नहीं हो रही हैं।
&उच्च जलाशय बनने के बाद बुनकर कॉलोनी, करीमनगर, रहमतनगर, नदीपार क्षेत्र के उपभोक्ताओं को पानी मिलने लगेगा। वहीं बुनकर कॉलोनी में जलाशय बनने के बाद रेगर बस्ती व वार्ड 14 के हालात सुधरेंगे।
नरेश सुमन, कनिष्ठ अभियंता

Shivbhan Sharan Singh
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